गिजू भाई बधेका का शैक्षिक चिंतन एवं आधुनिक भारतीय बाल - शिक्षा परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता | Giju Bhai Badheka Ka Shaikshik Chintan Avam Adhunik Bharatiy Bal - Shiksha Paridrishy Men Isaki Prasangikata
श्रेणी : शिक्षा / Education
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
289 MB
कुल पष्ठ :
356
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)उनके प्रयास निरर्थक जाते हैं। ऐसी ही बात बालकों के संबंध में हैं। बालकों में काम का एक समय
अथवा कहें, ऋतु आती है, उस समय वे काम को आसानी से पूरा कर सकते हैं। अगर शिक्षण के
उस क्षण को पहचाना जा सके तो पढ़ाने की माथापच्ची ही मिट जाए। इससे समय भी बचता है ओर
उकताहट भरी मेहनत से बचाव होता है। बालक स्वतंत्रता देने से बालक की यथार्थ कमियों एवं
मानसिक झुकाव को जाना जा सकता है। जिस क्षण बालक यह अनुभव करता है कि उसको देखरेख
करने वाला कोई नहीं, सचमुच उसी क्षण वह अपने व्यक्तित्व को वास्तविक रूप में प्रकट करता है।
यहां से शिक्षक उसे पहचान कर जैसा चाहे वैसा स्वरूप निर्मित कर सकता है।'
गिजू भाई कहते हैं कि ये अंतिम पंक्तियां भले ही इस समय स्वतंत्रता के दर्शन पर पानी फेरती
दिखायी दे रही हों, पर इस बात में कोई संशय नहीं कि स्वतंत्रता के सिद्धांत का मूल जॉन लॉक को
विचारधारा में विद्यमान है। लॉक इंद्रियों की शिक्षा के विचार को छूते हैं, पर ये विचार स्पष्ट नहीं
हैं। इंद्रियों की निरोग स्थिति उत्पन्न की जाए, ऐसी बात कहकर ये इंद्रिय शिक्षण को समाप्त करते
प्रतीत होते हैं।
कोंडिलेक (1715-1780):- ये लॉक के विचारों से प्रभावित थे। विश्व के संपक में आने से इद्रियों
को होने वाले अनुभव पुस्तक से इनके विचारों की जानकारी मिलती है। इंद्रिय-शिक्षण का स्वतंत्र
प्रबंध करने की बजाय अवलोकन-शक्ति और तुलना-शक्ति का प्रशिक्षण करने का था। यद्यपि
सीधे-सीधे तो कोंडिलेक ने इंद्रियों को शिक्षित करने का कुछ भी काम नहीं किया, तथापि बौद्धिक
शिक्षण में इंद्रिय-शिक्षण का महत्वपूर्ण स्थान है- ये विचार रूसो तक संप्रेषित हुए, इसमें कॉंडिलेक
के विचारों की सार्थकता है।
जेकब पेरेरा: - कॉंडिलेक के बाद पेरेरा आए|। ये पुर्तगाली समाज से आए स्पेन के यहूदी थे। 18वीं
सदी बहरों-गुर्गों की शिक्षा में शोध के लिए सुप्रसिद्ध है। पेरेरा द्वारा निर्मित पद्धति की सूक्ष्म बातों को
पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। एडवर्ड सेगुइन ने शोध करके उनके शिक्षण के कतिपय सिद्धाँत ढूँद
निकाले हैं। पेरेरा के विचारों से निम्न तथ्य उभरते हैं - ग
1... समस्त इंद्रियाँ और प्रत्येक विशिष्ट इंद्रिय शिक्षण में एवं विकास में सक्षम हैं। विकास के.
परिणामस्वरूप इनकी शक्ति को अनेक गुणी एवं अनंत बनाया जा सकता है।
2. ... एक इंद्रिय का व्यायाम दूसरी इंद्रिंय की सक्रियता का प्रेरक एवं परीक्षक है।
3. .... सुक्ष्म विचार एवं तुलना आदि मनःव्यापार इंद्रियगम्य अनुभवजनित हैं।
4... इंद्रियगम्य अनुभव (संवेदना) करने की शक्ति को बढ़ाने में मानसिक विकास का मूल निहित
हैं। थे
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