काव्य समीक्षा | Kavya Sameeksha

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Kavya Sameeksha by विक्रमादित्य राय - Vikramadity Ray

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१० काव्य-समीक्षा लब्ध है--जैसे भूत, यक्ष, परी आदि अथवा एक आदर्ण संसार की सृष्टि करता है जो ईश्वर की सृष्टि से कहीं सुन्दर तथा सराहनीय होती है । कवि की हर, ठी है; प्रकृति-सूृष्टि पीतल के समान है जिसे कवि स्वर्ण में परिवर्तित करता है ।* इसी युग के प्रसिद्ध भौतिकतावादी अंग्रेज दाशंसिक, “फ्रांसिस बेकन” ने कवि की इस उच्छूल्लल शक्ति का उल्लेख किया है जो प्रकृति के नियमों से 2 न होने के कारण प्रकृति की संयुक्त वस्तुओं का विभाजन तथा असंयुक्त का एकीकरण करते हुए एक ऐसे संसार का निर्माण करती है जो की अवृप्त इच्छाओं तथा आकांक्षाओं को सन्तुष्ट करने में समर्थ है” । वास्तविक सृष्टि अपूर्ण तथा न्यायशून्य प्रतीत होती है और संतप्त मनुष्य ब्रह्मा की भत्संता करने के लिए कटिंबद्ध प्रतीत होता है--'नाम चतुरानन पर चूकते 'चले गये ।” इसीलिये! उमरखय्याम के प्रेमी-युगल नियति के सहयोग से समस्त विश्व को पकड़ कर उसे चूर-चूर कर देने के इच्छुक है, जिससे कि वह एक ऐसे संसार का पुर्नानर्माण कर सकें जो उनकी अनुभूतियों के उपयुक्त हो * । १७वीं शताब्दी के मध्य से लेकर १८वी शताब्दी के अन्त तक का प्रायः १४० वें का काल वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास का समय माना जाता है 1 ७ (015 पि6 0०6. ताडितिककापंकरा ५0. 9४ पते ७0 धाए इप0- पु6०धिंणा, पडिडिप पछ नवेधि। ५6 एंड्0एा 04 पिंड 0नााा बाप एलए५ि00, ए065 डुए०५ा कए 0 धा001677 िकधिप७, कार एघ10 8 घिएए छुड छोपिए 6 96967 फिक्ा। फघ६पा6 90 छु6611 विएधि। 0फ, पुघाप्टि 8शला, ई0दाप5 पएा द8 | 661 फ्र6ा6 व &9पा' 6, 5. ५06. सिला065, 26ांए0०08, (01025 (़ाच्७ाघ8, पाशा65 690.....- फधिपाए्हड फणात उ. फाधड8ा1 धा0. ५106 0०66 घ0706 उं &0916 ७५0 पेहाएछा & हुएवहाए- ः <. पतन 9माघ्रेट शरण पिंहप 50 दि0. 958 04. एार्,टए, दा का फ16घ580ा6 पु फिक: फाएंगीा ऐप प85. 86ए00, फाए(ं 88९1 180 फाएं। ंधफएए'8 छाि। पुफिए60, घाऐ 80. ए्क्ार6 प्ाए1घर्पप 80165 8110. पाए0ए0684, «4-4 ५16 ए86 0 घितिड उहांछता 80 ]ए901% 10.0] ७७० ५0 ्ांग6 80006 8108007फ7 04 8 निंहडिएपिंणा क0 निए6 प्रवित 04 फाधत कं धि086 छूणेशाड फोवल्छोप घिए8 उपाए एव. घिफ0छुड तण०्छाा ठेह्पडा 1७ फाणत 9छंप8्ठ उप फुर0०फ0निंणा उंप्रस्सा0ए 9 ५6 80पो, ९. 9 य.0४७6 | ००प्त य ध्ातें हु०प पाल! 9 ए0ए8]ूपए6 पुष्ठ द्ुए85] धिपिंड 80 बडा 0. छिंपिंपुड 6५0 जाप 6 ए0 हिक9्टए पफ $0 005 पुष्ठ क00पॉते इ 700९7 0घपा' 68795 06876 हू




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