जैनधर्म शिक्षावली भाग - 5 | Jainadharm Shikshavali Bhag - 5
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
223
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(९)
प्रप ाप के चप्देशऋ फंड को दान, भिये हें था, मेमे भाते]
कृपया पहुंच स॑ फृवाये करें ।
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मम्मी-पथ्टि द्वीप”.
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षिपप पर एथ मनाइर स्पास््पान दिपा जिस को घुन कर
कोग अधि मसंझ इुए ! तद्नु समा भी मजन मदसती ने
पक मनोइर लिन स्तृति गऊर; समा का साध्ाड़िक.
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प्रशाद थी बड़े मसनन हुए भीर पद सन में मिंभ्रप शिपा
कि-इम सी सपने नगर में इसी मार सन्धुझस करत हुपे
चमे प्रचार करेंगे ॥
चठुधे पाठ
( भवन जैन कन्या पए शाखा
ुमस्दु, भर नगर के एक बड़े पविभ्न मोहन्ना में सेज
बऋत्पा पाठ शाका का स्थात्त दे षददों शोकिक था बािक
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