वापसी | Waapsii

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Waapsii by चन्द्रगुप्त विध्यालंकर - Chandragupt Vidhyalankar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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वापस , १५ भ्रन्ना श्रौर बच्चों की जगह मालूम थी । वह बदमाश वहां जा पहुंचा । ये सब लोग वहां गहरी नींद में सोए हुए थे कि वह चुपचाप १४५ बरस की लिजा को वहाँ से उठा लाया । बाहर थ्राते ही ठण्डी हवा के भोंके से लिज़ा जाग गई, तो श्रदंली ने उसका मृंह दवा दिया, ताकि वह चिल्ला न सके । 'लिज़ा थी तो सिफं पत्द्रह बरस की, मगर उसके जिस्म का उभार बहुत श्राकषंक रूप से निखर श्राया था । जमंन कमाण्डर ने जब उसपर बलात्कार करना चाहा, तब पहले तो वह बहुत अ्रचुनय-विनय करती रही । परन्तु जब वह दराबी सौतान बाज़ नहीं भ्राया और उसने लिज़ा को अपनी श्र खींचा, तो लिज़ा ने इतनी जोर से उसके गालों पर दांत गड़ाए कि उस बदमाश का एक गाल कट ही गया । तब उस जानवर ने उसी वक्‍त पिस्तौल निकाली श्रौर लिज़ा का काम तमाम कर दिया । जब उसे होश श्राया, तो श्रपना यह अपराध छिपाने के लिए उसने लिज़ा की फुल-सी देह को कम्वल में लिपटवाकर उसपर पेट्रोल छिड़कवाया श्रौर झाग लगा दी 1! इतना कहकर शोबर चुप हो गया । यह सब सुनकर भी वासिली चुपचाप बेठा रहा । न वह चिल्लाया, न रोया श्रौर न सिसका ही । छुपचाप श्रपलक नयनों से वह अपनी प्यारी लिज़ा के श्रघजले शरीर की श्र देखता रह गया 1 श्रस्ना अब तक संभल गई थी । वह श्रपने पति के पास थ्रा खड़ी हुई पर ' उसके बालों में प्यार से उंगलियां चलाने लगी । परन्तु भ्रब पूरा प्रयत्न करके भी वह वासिली का ध्यान झ्रपनी श्रोर श्राकृष्ट तहीं कर पाई । वासिली अब भी उसी तरह एकटक लिज़ा के झधजले दरीर की श्रोर देख रहा था । चुपचाप । न उसकी झ्रांखों में आ्रांसू थे श्रौर न उसके कण्ठ में स्वर था । सहसा वासिली को झनुभव हुमा, जैसे यह सामने पड़ा हुमा, अधजला, मसले हुए फूल-सा जिस्म उसकी लाइड़ली बेटी लिजा का जिस्म नहीं है, यह तो उसकी सद्दागडिगानारिर्ती सां--रूस माता के हुज़ारों-लाखों निरीह बच्चों का प्रतीक है ! श्रौर वासिली जानता है कि वह कौन-सा महादानव है, जिसने रूस- माता के घर के विद्याल झांगन को एक महाइमशान के रूप में परिणत कर दिया है | वासिली ने अपने में एक नई शक्ति श्रौर नई जलन का श्रनुभव किया ब्ौर वह चुपचाप उठ खड़ा हुम्रा । उसने श्रपनी पत्नी को यह भी नहीं बताया कि




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