भगवती कथा खंड - ४ | Bhagvati Katha Khand-vi

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Bhagvati Katha Khand-vi by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ४ ) छोग यद न कहें कि जन्म कम में तो यह एक परीक्षा में बैठा, उसमें भी छासफल रदा । नाम तुम्दारां बदनाम दोगा। मैं तो 'पा्परोडहं पापकर्माइड एपात्सा पाप समय रटत! हो हूँ। श्पने नाम की लांज सम्द्दारो । “जाइगी ल्लाज हु्ारी नाथ / मेरो का बिगेरेगे! । है पशुषति शिव क्लिनाय सम दानी 'सीसर | हे हर शंकर राम्मु सतीपि 'सलरा गोचर ॥ है मिने्र विषयारि मत सबके. सामी। है अन. मच्युत झलित जगपति अस्तर्योगी ॥ रहे मा, जगदस्पा जननिं 1 मेने बाबा ते कहो । चयी बहरे बैठे बने, च्यों निज शिशु हुर्गति सही ॥ श्रावण, स० १००५ वि ही नामसुस्त महाचारी सकीतन भयन, भसी ( प्रयाग 2




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