बीस कवियों की समालोचना | Bees Kaviyon Ki Samalochana
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
152
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( रे)( ग ) कालिं करन री आल कर, आज करन सो 'घब्य |
पल में पराय होयगी, यतुरि करेगा फरय ॥ !
( देसती नया श्रनगद भाएं हे
(ग) फीन ढगया गगरिया लुटल हो ।
सन्डन वाद को घनल स्यटोलना, तापर छुलडिन सूनत ये ॥
उदासी ससी मोरि सोय सेयारो मास उुलदा रुटल हो 1ढक कह. ३ हक हकक | के के के # के हे का केक कक( पूवी मापा )
(१) लघुता से प्रमुता मिलें, मभ्रुता से मभु दूरि।
चॉटी से सदर चली, हाथी फें सिर धूरि ॥
( खऱी दोली )
(९३ इसने के हस्क सस्ताना, हमन को शोशियारी फ्या 1
ही ्ाजाद या तंग से हमने दुनिया से बारी पया ॥
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