समाजशास्त्र की रूपरेखा भाग - 2 | Samajshastra Ki Rooprekha Bhag - 2

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
504
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)भ्रध्याय पृष्ठ
२२. अपराध कक ज३
€ एपंफ्ार )
रद
रश.
रद.
झ्पराघो का वर्गीकरण--झपराध के कारण--शपराधो का नियन्त्रण
दण्ड का सिद्धास्त -सुधारात्मक सिद्धा्व--म्रपराधी और समाज--
अपराध निरोध ।
दाल श्रपराध दे६ रे १७
4 उाश्यर? 9हंचपूणशाल |
बाल अ्रपराघ का ग्र्थ--वाल अपराधी तथा वयस्क श्पराधी में अस्तर--
बाल अपराघ का विस्तार--वाल अ्रपराधों के प्रकार-- बाल श्रपराध
निरोध--जाल न्यायालय की उत्पत्ति तथा विकास--वाल न्यायालय
त्तथा अन्य स्यागालयों में तुलना -बाल श्रपराधी का उपवार ।
सप्तम खण्ड
मानव प्रकृति एवं सामूहिक व्ययदार ४१४--४६८
( सिपाका रपट बाएं एलाधटपं१€ सट81पं0घा )
मानव प्रकृति--( पाए परिवएट )
पशुम्नो के व्यवहार के झाधार पर 1 इररे-इरर
ट्रापिज्म और प्रतिक्षेप क्रिया इर३े-४२६
( णफोड्चा 2घत एिधड (पी )
प्रतिमान प्रतिक्रियापो का अर्थ--ट्रापिज्स--ट्रापिज्स के सिद्धान्तो की
ब्ालोचना -प्रतिक्षेप क्रिया--कार्य प्रणाली--साधारण प्रतिक्षेप क्रिया,
स्ूखला-प्रालोचना--प्रतिक्षेप किया तथा ट्रापिम्स में अन्तर ।
सुल्त प्रवृतियों का सामान्य स्वरूप ३०्थर
( एहालाओ ऐरे2(पा€ 0 व्िनीपटड )
मुख प्रवृत्ति का ग्र्थ--कुख अन्य विद्वानों द्वारा मूल प्रवृतियों की
परिभाषायें--मूल प्रवृति ब्ौर प्रतिकषेप क्रिया - मेकंडूनल के मूल प्रवृति
सिद्धान्त की कुछ विशेषतायें--आलोचना--सुल प्रवृति और बुद्धि का
सम्बन्ध 1
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