हिन्दी और राजस्थानी भाषा का तुलनात्मक अध्ययन | Hindi Aur Rajasthani Bhasha Ka Tulanatmak Adhyayan
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutRamkrishn Mahendra
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
236
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about रामकृष्ण महेन्द्र - Ramkrishn Mahendra
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)वीकानेर एवं जयपुर का पश्चिमोत्तर भाग है । राजस्थानी की भ्रय
सभी शाखाओं से यह भौगालिक क्षेत्र, बोलने वालो की. जन सरया,
साहित्य श्रादि सभी दृष्टियो से समृद्ध है । प्रियसंन ने इसके बोलने
वालो की जन सख्या ६० लाख वताई है । मीरा मारगाडी की
प्रतिनिधि कवयित्री थी । राय पृथ्वी राज द्वारा रचित बेलि किसने
रुकमणीरी भी मारयाटी की प्रमुख रचना है । ब्रज्रभापा के प्रचार
प्रसार एवं महत्ता के पार ण पिंगल के साइश्य पर स० डिकर
(सिबक चारण) >> डिंगर >डिंगल शब्द मारवाड़ी भापा का वाचक
हो गया । जोबपुरी, वीकानेरी, मेवाडी थली, ठटवी आदि इसकी
उप वोलिया ह ।
क्षेत्रीय आ्राधार पर मारवाड़ी के मुख्यत चार भेद है-
श दूर्वी मारवाड़ी २ पश्चिमी मारवाड़ी, दे उत्तरी मारवाढी, ४
दक्षिणी मारवाडी । पूर्वी मारवाड़ी के अझन्तगत मगरा बोली ( मग-
रबी ) मेवादी, मारवाड़ी, गिरासिया की. बोली, मारताडी ढुढारी,
मेवाड़ी वोलिया ्राती है. ।. गोडवाटीं, सिरोही, देवडा
घाटी तथा मारवाड़ी गुजराती, दक्षिणी मारवाड़ी की वोलिया है ।
पश्चिमों मारवाड़ा में थली एवं ठटकी थोलिया श्राती ह । बीकानेरी
शेखावादी तथा वागडो, उत्तरी मारवाड़ी वी शाखाए है ।
सगीत के क्षेत्र म 'माड' राग के लिए मारवाडी को सर्वो-
ररप्ट भाषा माना गया है । कहा भी गया है “छदो में सीरठ छुद
एव रागों मे माड राग जितना सारवाडी मे झच्छा निखरता है उत्तना
अच्छा झप किसी मे नही ।
User Reviews
No Reviews | Add Yours...