सुकांत के सपनों में | Sukant Ke Sapano Men

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
148
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)-दस, उन पर हंसी आती है ।
हो हो, पीजी चुररोबायी दें बारे मे तो जान सो। मैं दुबारा
हागावाय गया दा । मालूम हुआ, दॉस्टर सबसे अत में वहाँ लव पहुँचा
गद्या से घोर -चोररशर रपताय सिर पर उठा डासा 1
गुनो, पिरजय हुमा हे
डॉविटर ने सदवी की पद आगे स्वोतरर भोतर सागा, तो मौत देरा
इतने बंटी थी । स्टेयोस्वर पहने ही चुप था । अब देवारा डॉस्टर सिवाय
हपसोग में सिर हिताने दे अलादा कया बरता ?* छसने यही किया कि
इुदिया मे बिली की सरह सपटवर डॉक्टर का मुंह नाच लिया । लोग
दौईे घोर बुद़िया को पपदा। सरत-जान बुद्धिया कहाँ कावू में आती ह
हु िबदान देवर उसे बेहोश बरना पडा ।
डॉक्टर मे बहा, “बुदिया दौरे से पागल हो गई है ।”
जरा शुम भी सोचना दि युदधिया पागल हो गई या.
यहाँ भी हसो / 15
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