हिन्दी के स्वीकृत शोध प्रबंध | Hindi Ke Savikrat Shodh Prabandh

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Hindi Ke Savikrat Shodh Prabandh by उदयभानु सिंह - Udaybhanu Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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रूप श्ह्ट श्घ० श्घ बलचछ श्घप १म्दे तप १८४, ८६ श्८७ श्दे « हिन्दी-रीति-परम्परा के प्रमुख आचाये राघावल्लम सम्प्रदाय के सन्दर्भ में हितहरिवश का विशेष श्रृष्ययन कविवर परमानन्ददास श्रौर उनका साहित्य हिन्दी के पौराशिक नाटकों का श्रघ्ययन कंवीर की कृतियों के पाठ और समस्याओं का आ्रालोचनाह्मक श्रघ्ययन मध्य-युगीन हिन्दी काव्य में नारी-भावना (१४५००-१७५० ई०) हिन्दी -कृष्णा भक्ति-काव्य पर पुराणों का प्रभाव डिंगल-पद्य-साहित्य का श्रव्ययन ब्रजवुली श्राघुनिक प्रालोचना की प्रवृत्तिया कंविसमय-मीमासा हिन्दी में गद्थ-काव्य का विकास सूरपूर्व की ब्रजभाषा रे २२४ श्र र्र्घ २२६ २३० रदेर २३३ रे वर्ड २३४ रद २३६ हिन्दी की नियु णामार्गी काव्यघारा श्रौर उसकी दार्शनिक पृष्ठभूमि २३५८ मध्ययुगीन हिन्दी-साहित्य के प्रेममाया-कान्य श्रोर भक्ति-काव्य मे लोकवार्तातरव प० वालफृष्ण भट्ट * उनका जीवन और साहित्य भारतेन्दुकालीन नाटक-साहित्य वावू वालमुकुन्द गुप्त--उनके जीवन श्रौर साहित्य का भ्रघ्ययन , 'शिवसिह सरोज' में दिये कवियों सम्बन्धी तथ्य एवं तिथियों का झ्रालोचनात्मक परीक्षण 'कामायनी' मे काव्य, सस्कृति श्रौर दर्शन श्रपश्रशनसाहित्य मालव-लोकसाहित्य--एक भ्रष्ययन झाधुनिक हिन्दी-साहित्य मे श्रालोचना का विकास (१८६८- १६४३ ई०) गढवाली की रावल्टी उपयोली, उसके लोकगीत श्रीौर उसमे अभिव्यक्त लोक-सस्कृति कृत्तिवासी चगला रामायण श्रौर रामचरितमानस का तुलनात्मक शघ्ययन २४० रे २४३ रो प् र७ र४८ रेट सर




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