प्राचीन भारतीय महाकाव्यों में स्त्रियाँ की सामाजिक स्थिति | Prachin Bharatiya Mahakabyo Me Striyo Ki Samajik Sthiti

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सका. टू. #कवाल्मीकीय रामायण का ही संधिग्त रूप माना है । महामारत सै यदमी प्रुचित होता है कि उसकी रचना कै समय राम हैश्वरत्व प्राप्त कर कुकथे जौर शससे सम्बद्ध स्थान तीथे माने जातै थे , श्गबैरपुर और गौत्याए का उल्लैख कसी रुप मैं मिलता है । चन्द्र पाण्हैय नै मी रामायण कै रचनाकाल कै सम्बन्ध मैं सप्त सिद्धान्त स्थिए किये है , जिसके जलुसार रामायण बौद्ध घमे सवं ग्रक प्रभावों सै सवैथा अकूती है जौर रामायण की मूल कथा बौद्ध थम कै आविमाँव सै पूवै की है और उसकी रचना लगमग ४०० ० पु० मैं हो चुकी थी । याकीबी प्रचलित रामायण कै वतैमान रूप की पहली या दूसरी श्ताव्वी दैस्वी का मानते हैंवैवर मे वाल्मीकीय रामायण की कया का मूल उद्गम दशरथ जातक में वर्ण्ति रामकथा को माना है | 'विद्यानों ने वैवर के इस मत की फ्याण्त बालौचना फी है । कफ सी अधिकांश विद्वानों ने बेवर के मत की ही मान्यता प्रदान की है । यथपि याकीबी कै मत का समन करते वाले बिधानोंआज अ. कु. कु...१ 'विमकर्‌ « संस्कृति के चार अध्याय ,. पृ० ८३र पाण्डेय - संस्कृत पादित्य की रूपरेखा ,. प० ०२२३ य० याकौबी' “ दस रामायण , पूछ १००है ढो9 जेवर « आन दि रामायण , पर ११ आदि४ यम विलियम्स » इंडियन विजढम, पृ० ३९४ , याकौबी - दस रामायण , प० ६४ आदि । पैकडौनस « चि० सं० 'लि० , प्र० ३००८ । सी० वी० वेभ दि दिस आफ थि रामायण ,. पृ ४१९ ।दै- ढा० वेद « बन दि रामायण , 'विनैशनन्क देन « दि कंगासी रामावस्थ पक ७ दे । ज़ियसन « चगेश आफ राय० एल सी० ,फुर ९३ ४०१३६, !. रररर 3,




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