श्रमण संस्कृति मनवीर जयंती भाग १ | Shraman Sanskriti Manaveer Jayanti Bhag 1
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
581 KB
कुल पष्ठ :
74
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)शव भाना १3
मू० न सेवियव्वा पमया परका;
न सेबियव्वा पुरिसा अपिज्ञा ।
न सेद्यिव्वा अद्मानदीणा,
न सेवियव्वा पिशुणा मणुस्सा ॥१३॥
छा० न सेवित या' प्रमदा परकीया,
न सेवितब्या पुरुपा अचविद्या 1
न सेवितव्पा भभिमानद्दीना
ने सेचितब्या पितुना मनुप्या ॥१३॥।
खध-मलुष्ये पारी अभधनखी सेवी नि (परी-
बषपट ने थी पिया चगरना घुरेपे।ी, (2६२५ देव ह आागी.
तेभुनीप सेवा उस्दो नठ्धि (लेना नसाशरे ने रहेवु) सलिनानी,
तथा दीन सेंटने नीय मायुसानि सदा नदि (तिमना सेव
यु नहिं ) जथवा मधिमानदीन सोटने न? भाशुसा नाधभ।
भान-अतिक्ा वरना ऐव तेमनी सेणत उसी नदि तेमर
पिशुन सेटने यारी-सुगधी धरनार नानी पशु सेवा-सेएसत
न धरपी १३
मू० #जे घम्मिया ते खड सेरियिव्वा,
जे पढ़िया ते खछ पुच्छियव्या ।
जे साइुणों ते अभिवदियव्वा,
जे निम्ममा ते पडिलामियव्या ॥१४॥
+ टन्तखा
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