अपूर्वा | Apurva
श्रेणी : काव्य / Poetry

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
343 KB
कुल पष्ठ :
94
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मे बुझी
आग की गाँठ है
सूरज :
हरेक को दे रहा रोशनी--
हरेक के लिए जल रहा--
ढल रहा--
रोज सुबह निकल रहा--
देश और फाले को वदल रहा ।२ अप्रेल, ६८मूर्वा (२१
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