आकाशवाणी काव्य संगम (१) | Akashwani Kavya Sangam (i)

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मैथिलीशरण गुप्त - Maithili Sharan Gupt

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रामधारी सिंह 'दिनकर' - Ramdhari Singh Dinkar

रामधारी सिंह 'दिनकर' ' (23 सितम्‍बर 1908- 24 अप्रैल 1974) हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं।

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श्री सुमित्रानंदन पन्त - Sri Sumitranandan Pant

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भारत सदाय ब्राद्िन स्वाधीन भ्राजिग्रो स्वाधोन आमि । पयत्रिश कोटि भारतव'सीये विर्व थाकिब जिनि । युग अवतार श्रीरामचन्द्र कृष्ण बुद्ध शाकरर जनमदायिनी भारत्तवर्ष ज्ञानदात्री मानवर । भारतर सजीवनी प्रति धूलिकणार माजत, आछे लेखा महत्वर पुण्य लिपि-बुरजी पात्तत श्रनन्त विज्ञान ज्ञान महानता महिमा विकाश अमर श्रात्मार ररिम प्रज्ञालोके विङ्व परकाडा । सा्राज्यर सघातत शान्तिहीन राडली पृथिवी । हिसाद्रष लोकक्षध् पपे म्लान युगर सुरभि । स्तम्भित जीवन धारा थमकिल जीवनर गति, साम्राज्य पीडित श्रात्मा जनगणे मागिलं मृकुति । कपिल उत्तराखण्ड तथागते दिले शान्तिवाणी, ज।वप्रेम ग्रहिसार महाधम्पं पेचङील' दानि । सास्राज्य उत्सर्गी दिले मानवर कल्याण ब्रतत, सत्यप्रेम श्रहिसार व्यागमय जीवन पथत शिकाले महान मन्त्र मारतत नव जीवनर, बिलाले भ्रातृत्व प्रीति विद्व म्री मरु मरतर । सेड मन्त्रे भारत जागिल, महात्मार महिमा प्रकादि विश्व चमकिल देखि भारतर अ्रपुन्बं सन्यासी, महात्मार ध्यान स्वगे प्रजातन्त्र भारतवष॑र मानृहे रचिब युग भारतर नव विधानर । मक्त भारतर प्रजा मुक्त वायु आकाश मण्डल, प्रजातन्त्र उचवर बरघिछे ्रारिष.मगल । हियाइ हियाइ फूल प्रेरणार सुखर कमल । बाधाहीन जनस्रोत श्रमियान उल्लास मुखर, स्वाधीन जीवन गति शक्तिमान भारत सन्तान नव जीवनत जागे कम्ममय विशाल श्राह्(न । {न बॉियेजि उाअविन न-नयय कला नपयप्यायना कि




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