बनाम्बरी | Banambari
श्रेणी : धार्मिक / Religious
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
7 MB
कुल पष्ठ :
353
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)नाणाम्यरोंवत्स-वंश विख्यात सकल उत्तर भारत में
देव-विभा थीं व्याप्त वाणि-सुत सारस्वत में
महाशोण में त्रहम-सोत अन्तर-परिलक्षित
वाद्यवृन्द पर साम-गान कानन मं मुखमितिज्ञानदान में चित्रभानु दौ जातं तन्मय
राव्द-कुसुम से छात्र-भग करते सधु संचय
स्वरवन्तं पर इलोक-सुपर्णा-घ्वनि दादूर्-सम
स्थान-स्यान पर नृत्य-निवेदित चरण झमाझमहिमगिरि को भी चित्रभानु दिग्देश दिखाते
शीरुभद्र : कुलपति, नारुदा से जव आततं
शोणभद्र में सागर की गहराई भी हैजल पर त्तुग ह्मालय की परछाई भी हूँदूर-दूर से शास्त्र-अपधिक जब आया करते
जीवन-दर्शन-घन जन-मन पर छाया करते
भानु-मुखश्नी -इवेद पोंछती स्वयं भारतीदुढ़तर पग डगमग करते तो वह संँवारतीतत्त्वपुरुष निज त्याग-ज्ञान के बीच खड़ा है
उन्नत मस्तक आदि काल से ही निखरा है
दिव्य तथागत-तप से भी वह नही डरा हैउसका प्रखर प्रकाश प्राण-भू पर बिखरा है२
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