प्रबन्ध कल्पलतिका प्रथमस्तवके रचनाशिक्षा | Prabandhkalplatika Pratham Stavak Rachna Shiksha

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रबल्ध-कल्पछठतिका प्रथमस्तवके रचनाशिक्ता मङ्लाचरयम्‌ ध्वान्तग्रशान्तकौ नित्यौ यः खितः सव्वं मूष्ैनि । तं नौमि रजनौकान्त' विघ्र्वान्तप्रश्ान्तयै ॥ प्रबन्खरूपम्‌ परस्परसम्बन्धवि शिष्टवाश्च चयेन कस्य विदिषयस्यावतरणम्‌ प्रवन्धो नाम । प्रबन्धप्र कार: स हि किल प्रबन्धो गद्यपदयभेदेन दिविधो रचनोय: । ५, यतिमात्रादिछन्द:शास्त्रायासुपदेशमन्तरेण परस्पर सम्बन्धविधिष्टवाक्वससहानां विन्यासो गयम्‌ । यथा--यस्य




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