नेताजी और आजाद हिन्द फ़ौज | Netaji Aur Azad Hind Fauj
श्रेणी : इतिहास / History

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutMajor General Shahnavaj Khan
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
13 MB
कुल पष्ठ :
386
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about मेजर जनरल शाहनवाज खां - Major General Shahnavaj Khan
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)११
तरह कामन दे सके! माच से कोई समाचार न मिलने पर नेतःजी
दिक्षुब्ध होगए । आपने मन्तरिदल में से एक पाटी फो मोचं पर जाने भौर
वहां से पुरे समाचार लाने का श्रादेश दिया । सोचे पर तेनात श्रफसरों मौर
सैनिकों पर इस पार्टी के पहुंचने श्रोर नेताजी द्वारा उसके भेजे जाने
का समाचार जानफर चमत्कारपुर्ण प्रभाव पड़ा । उनको पता चला कि
नेताजी उनके लिए कितने चिन्तित रहते हूं ? श्राप उनके सच्चे दोस्त
घ्रौर साथी ही तो थे ।
हिन्दुस्तान से श्राने वाके समाचारो को घाप बहुत उत्सुकता के साथः
चुना करते थे । जव श्रापने कंगाल में दुिक्ष पड़ने और हजारो आदसियों
के वहां सरने का समाचार सुना तब श्राप बहुत ही प्रवित हो उठे ॥
श्राप हमेशा इस विचार में मग्न रहते थे कि इस घोर विपत्ति में.
आपद्ग्रस्त देशवासियो की सहायता कंसे की जाय । इस विपत्ति पर
आपका हदय से पड़ता था । आपने स्यामी श्रौर वर्मी सरकार से एक
लाख टन चावल खरीदने का इन्तजाम किया । श्रपने इन्तजाम में इस
चावल को कलकत्ता पहुंचाने का प्रस्ताव आपने श्रग्रेज सरकार के
सामने रखा श्रौर उससे इस बात की गारण्टी मागी कि चावल ले जाने
वाले जहाजों को सुरक्षित लौटने दिया जायग/ । जैसी उसीद थी, वैसा
ही हुमा । ध्रंग्रेज सरकार ने इस प्रस्ताव का कुछ भी उत्तर न दिया ।
फई बार नेताजी ने इसे पेदा किया, किन्तु कांग्रस सरकार ने इसका
कुछ भी जवाब न दिया । मानो लाखों मरने वालों की उसको
कुछ भी फिक्नर नथ 1
एक बार एक जनरल स्टाफ का एक जापानी चीफ नेताजी के पास
आया । उसने भ्रापके सामने कलकत्ता पर बम-वर्षा करने कौ योजना पेश
की श्रौर उस पर ध्रापकी राय मांगी । श्रापने तुरन्त कहा कि जहां तक
मेरा सम्बन्ध है, में अपने सुन्दर शहर को वम-वर्षासे नष्ट-श्रष्ट
ह्र देखना नही चाहता । मं श्रपने देशवासियों को श्राशा श्रौर उत्साह का
संदेश देना चाहता हूं। कष्ट, संकट भ्रौर मृत्यु उनके लिए उपस्थित करने
User Reviews
No Reviews | Add Yours...