मुन्नी की डायरी | Munnii Kii Daayari

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
202
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ११ )क्रांति के लिये हमारे सामने बड़ी-ब्ड़ी सांस्कृतिक और
भौतिक कठिनाइयाँ हैं ।””लेनिन को जो कुछ करना था, उसने कर दिखाया |
उसके सामने जो विध्न-बाधघाएँ आई, उन्हें वह वीरतापूर्वक
भेलता गया । अन्त में उसने सारे रूस में सांस्कृतिक क्रांति
मचाकर ही कल की ।गंभीर भाव से जनन-मनोविज्ञान का अध्ययन करने
पर यह बात ठीक जैंचती है कि बालकों में अश्राकृतिक व्य-
भिचार का श्रीगणेश तभी होता है, जब उन्हें प्रतिकूल
वायुमंडल में रहकर मेथुन-संबन्धी बातों के रहस्य का पता
लगाने और मेथुन करने की उत्कट इच्छा होती हैं । जब
उन्हें उसके रहस्य को अच्छी तरह समभने का मोक़ा नहीं
मिलता, तो वे अधीर होकर अपने शरीर को नष्ट कर
डालते हैं । सोचते हैं, इसीमें दुनिया का आनन्द है |
हमारे वत्तेमान समाज में बच्चों के प्रति बड़ी उदासीनता
दिखाई जाती है--उनके प्रति कत्तव्य पालन नहीं किया
जाता ।यह तो सवंसम्मत है कि अप्राकृतिक व्यभिचार
जितना पुरुषों में फैला हुआ है, उतना खतियों में नहीं ।
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