जैन तत्वादर्श [भाग 1] | Jain Tatvadarsh [Bhag 1]

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Jain Tatvadarsh [Bhag 1] by हंसराज बच्छराज नाहटा - Hansraj Bachchharaj Nahata

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(३ 9 चिपय अदरैतथाद का खस्डन मायावाद्‌ का खण्डन श्री शङ्कराचाये रौर सरसवाणी अद्वैत द्य, तत्साधकं अयमान का खण्डन सापेत्त ईश्वरकतेख का खण्डन सैयायिक तथा बैशेपिक के ईश्वर का स्वरूप और तत्साघक अनुमान उक्त अन्लुभान का खण्डन कभफल-प्रदाता भी ईश्वर नदीं क्रीडार्थं सृष्टिस्वना की असंगति एकत्व का प्रतिवाद्‌ सवेन्यापकता का प्रतिवाद सवेन्नता का प्रतिवाद नित्यता का प्रतिवाद खरडज्ञानियों से ईश्वर चर्चा ततीय परिच्छेद सुगुरु का स्वरूप पांच मद्दा्रत का स्वरूप प्रथम अर्स बरत द्वितीय सत्य त्रत पृष्ट ६७ १०४ १०६ ११५ ११६ १२० १२४ १३२ १३५ १३८ १४० १४२ १४३ १४४ १५५ १५६ १५७ १५७




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