तेलुगु वाड्मय विविध विधाएँ | Telugu Wadmay Vividh Vidhaen

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Telugu Wadmay Vividh Vidhaen by बालशौरि रेड्डी - Balshori Reddy

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तेलुगु भाषा और साहित्य ४85 ''पलिकेडिदि भागवतमट पलिकिचेड्वाड रामभद्रडट ते पलिकिन भवह्र मगुनट पलिकेद वेरंडगाथ पलुकगनेल ।'' अर्थत्‌--' भमै भगवान की सजना कर रहा हू । भगवान रामचन्द्रजी स्वयं मेरे मुँह से बुलवा रहे हैं । इस ग्रन्थ की रचना द्वारा भवसागरसे पार पा सकता हू; अतः मै किसी दूसरे काव्य का प्रणयन क्यो करू !”' पोतना भगवत भक्ति प्रधान काव्य है । इसमें भक्ति और वेदांत संबंधी अनेक आख्यान वणित हैं जिनमे प्रह्लाद चरित, वामन चरित, श्वरद्धार गजेन्द्र मोक्ष, नरकासूर वध, कुचेलोपाख्यान, ध्रू.वोपाख्यान, अंबरीषोपारुयान ओर रुकिसिणी-परिणय विशेष' लोकभिय हैँ। ये आख्यान महाकाव्य की श्यूखला की कड़ियाँ होते हुए भी स्वतंत्र अथवा भिन्न खण्डकाव्यों के रूप में बन पड़े हैं । पोतना की कविता प्रांजल, ललित एवं मधुर है । इस काव्य में चमत्कार बैचित्य और उक्ति वैचित्र्य दृष्टव्य हैं । कवि सावभौम श्रीनाथ इस युग की सबसे बड़ी विभूति थे । तत्कालीन सभी राजदरबारों में जाकर कनकाशिषेक का सौभाग्य प्राप्त किया । इनके वामपाद में गण्डपेण्डेर (स्वर्ण घंटिका) पहनाकर सम्राटों ने अपना अहोभाग्य माना । धन, कनक, वस्तु, वाहन, अग्रहार उपाधियाँ देकर इनका सत्कार किया । थे रेड्डी राजाओं के दरबारी कवि थे और वहाँ शिक्षाधिकारी के पद पर नियुक्त थे । अपने जीवन-काल मे इस महाकवि ने जैसे ऐहिक भोग-विलासों का अनुभव किया, वैसा अन्य कवियों के लिए दुलेंभ था । तेलुगु के मर्मज्ञ विद्वान चिलुकूरि वीर भद्रराव ने एक स्थान पर लिखा है-- “श्रीनाथ का जीवन-चरित्र प्रस्तुत करनेका अभिप्राय है, १५बीं शतीके आन्ध्र देश का इतिहास लिखना ।” इन्होंने एक दजन से अधिक काव्य-ग्रन्थों का सृजन किया है, जिनमें “श्ज्जार नेषधमु', काशी खण्ड, (भीम खण्ड, 'पलनाटि वीर चरित्र, शिवरात्रि महात्म्यमु', हरविलास मख्य है । तेलुगु कविता को प्रौढता प्रदान करने काश्य श्रीनाथ को प्राप्त है । तेलुगु वाङ्मय की विविध शाखाओं को जन्म दिया तथा भाषा, भाव, शैली, छन्द, अलंकार आदि की दृष्टि से भी समृद्ध बनाया । चाटूकितियों के कहने मे भी ये अत्यंत पटु थे । सिरिगलवानिकिं जेल्लुनु' नामक पद्य में कवि ने अपने आराध्य पर अच्छा व्यंग्य कसा है । इसमे उनकी विनोनप्रियता का भी परिचय मिलता है । एक बार कवि पहाड़ी प्रदेश में यात्रा कर रहे थे । उन्हें बड़ी प्यास लगी । आराध्य देव का स्मरण किया--हे परमेश्वर, विष्णु जैसे धनी व्यक्ति चाहे सोलह हजार नारियों के साथ विवाह कर सकते हैं, तुम तो फकीर हो, तुम्हें दो




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