चिन्मय | Chinmay

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : चिन्मय  - Chinmay
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about श्री सत्य - Sri Satya

Add Infomation AboutSri Satya

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
चिस्मय ७में उस अर्निय युन्दरी को देखता री गह गया 1सरकार साहव की विशेष कृपा को उस मोंटेल की सहज स्वीकृति जेंने मिल गयी हो । रंगौन परोंवाली तितली की तरह सुसकराहट उसके चेहरे पर, पर फेला कर उड़ गयी । मैं सम्माहित सा, ठगा हुआ सा, वहीं खडा रह गया । तय उसने कहा, गे एण्ड निट!मुझे असमथता, अनानता का भान हुआ । कापी पेसिल सभालकर, एक खाली सीर पर, सबसे पीछे बैठ गया ।देखता रहा, उस मोटेल की ओर, जो मरी ओर नहीं देख रही थी ।दैमोस्ट्रेटर महोदय आ गए। प्रविष्ट व्रियावियो क पाय ने उन्होंने प्रवेश टिकट ले लिए। मेरे पान भी आए, तभी उसने आकर, जैसे अचानक याद आ गया हो, कहा, सरकार साय आए ये । उन्होंने इनके बारे मे कहा है कि इन्हें चेठने दिया जाय ।स्ट्रटिर ने सुससे फुछ भी नहीं पूठा । वे दोनों साथ ही साथ सामनेसजाए हुए त्तस्तें पर चले गये । टेमोस्ट्टेर महादय तख्ते से नीचे इतर आये । सामन वटे नियायियो के। प्रारम्मिझ निर्देशन देने लगे ।वह महिला तस्त पर सदी हो गयी । लगा कि जमे बह सारा क्ठास को नौलने का प्रयत्न कर रही हो । एक ही क्षण के पधात नेयमी नार्य नीचे सरकने लगी 1 वर पास ही एफकनित हो गये । उसका गोरा शरीर अनावरण हो गया ।नम |म उपर्‌ म नेचि नक विद्र सखा गयापठन ठार नानोदय हुभे~-परट स्य है ।से एफटक इसकी सर देता न्दा । टमेद्धदर कटी निमा मे सोवा झुसा तो चेय चनासे में नस्टीन हो गया मार भावनाएं पेस्ट से रीची जनियार्टी रेगाजा में जद ही दनी रहीं दिन गोमय न्म जाने गया५} 4} +~५4 [1 श ~व गया था उसके आनार्रप झधिए ना उनि ला सकता । न्ह~~यारिए भट सन गया |




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now