भाषा - शास्त्र प्रवेशिका | Bhasha - Shastra Praveshika
श्रेणी : साहित्य / Literature

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Add Infomation About. Dr. Motilal Gupt
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
109
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१०
मापा की प्रवृत्ति के बारे में याद रखें-- $
(१) माषा चिर परिवर्तनशील है ।
(२) परिवर्तन प्राय: सीधी रेखा के रूप में है अतः अ तिम स्वरूप नहीं हो
सकता 1
(३) सामान्य सिद्धान्त “तो कठिन से सरल की मोर है पर लिखित रूप कुछ
विकृतियां उपस्थित कर देता है 1
(४) सैद्धान्तिक रूप में मापा प्रति पग, प्रति क्षण परिवर्तित होती है इसे इस
प्रकार देख सकते है । | प्रतिप (समय)
1
|
4 द.
+ परिवतनशीलता
|
†
|
(1
1
------>-->-->----> -- “>
मुल रूप प्रतिपग (स्थान)
(यदि कोई रहा हो)
प्रकृति तथा प्रवृत्ति दोनों को मिछाले तो सामान्य विद्वेषताओं के साथ मिल
कर 'माषा' का पुर्ण स्वरूप उपस्थित हो जाता है ।
मापा
उच्चरित--(लिखित)
। दि!
। त भाषा का त ६
परिवतेनशील |- प्रवृत्ति | स्वरूप |> प्रकृति ~| अनुकरण द्वारा अजित
। |
| (८
4
विशष बातें
1 ~~~ नए
व्यक्त, व्यवस्थित, सा्थेक
वर्गं की इच्छानुसार
अवतो माप डन दो प्रश्नो कां उत्तर दे सकंगे-
(१) माषाका स्वरूप स्पष्ट कीजिए ।
(२) विचारप्रकाशन की क्रिया पर अपने विचार लिखिए ।
~~: 9 * ~
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