राजपूताने का इतिहास [दूसरी जिल्द] | History of Rajputana [Dusri Jild]

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History of Rajputana Vol II by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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उदयपुर राज्य का इतिहास ५७७ <^ ^^ ^^ ^^ ^^ ^^ ^~ भ ^ ^ ज ^ ^^ ^ ~ मेडावर के राठोड्‌ राव चूडाने अपनी गोदिल वंश की राणी पर अधिक प्रेम होने के कारण उसके बेटे कान्हा को, जो उसके छोटे पुत्रों में से पक था, राट्रोब रणमल का राज्य देना चाहा । इसपर झप्रसन्न दोकर उसका ज्येष्ठ मेवाड़ में झाना पुत्र रणमल्र ४०० सवारों के साथ महाराणा लाखा की सेवा में आ रद्दा। मद्दाराणा ने चालीस गांव देकर उसे अपना सरदार बनाया' । इस महाराणा की वृद्धावस्था में राठोड़ रणमल की बहिन हंसबाइई के क्षबध के नारियल महाराणा के कुःवर चूडा फ लिये श्राय, उस समय महारासा चूडा का राज्या- ने देसी मे कद्दा कि जवानों के लिये नारियल श्चाते है, विकार छोड़ना हमारे जैसे बूढ़ा के लिये कौन भेजे 2 यदह वचन सुनते ही पिठमक्त चूडा के मन्म यह भाव उन्पन्न हुश्चा कि मेरे पिता की इच्छा नया विवाह करने की है । इसी स प्रेरित दाकर उसने राव रणमल से कष्टलाया कि श्राप अपनी बहिन का विवाद महाराणा के साथ कर दीजिये। उखने दख बात को स्वीकार न कर कद्दा कि महाराणा के ज्येष्ठ युत्र होने से राज्य के झधिकारी छाप दैं, झतपएव आपके साथ शादी करने से यदि मेरी बढिन से पुत्र उत्पन्न हुश्रा, तो वह मेवाड़ का भावी स्वामी दोगा, परंनु महाराणा के साथ विवाद करने से मरे भानजे को चाकरी स निर्वाह करना पड़ेगा । इसपर चूडा ने कटा कि झपकी बढिन के पुत्र हुआ, तो वह मेवाड़ का स्वामी होगा और में उसका सेवक बनकर रहद्ूंगा। इसके उत्तर में रणुमल ने कदा, मेवाड़ जैसे राज्य का अधिकार कौन छोड़ सकता है ! यद्द तो कटने की बात है । इसपर चूंडा ने पकलिंगजी की शपथ खाकर कहा कि मैं इस बात का इकरार लिख देता हं, शाप निश्चित्त रदिये। फिर पने श्पने पिता की इच्छा के विरुद्ध झाग्रद्द कर उनको नर शादी करने के लिये बाध्य क्रिया और इस आशय का प्रतिक्षा-पत्र लिख दिया कि यदि इस विवाद से पुत्र उत्पन्न हुआ, तो राज्य का स्वामी वही (१) सारवाड़ की ख्यात में रणमल का महाराणा मोकल के समय मेवाड़ में श्याना श्ौर जागीर पाना लिखा है ( जि० १, प० ३६३), जो विश्वास के योग्य नहीं है, क्योंकि रणा- मल के मेवाद में रहते समय उसकी बहिन हसबाई के साथ महाराणा लाखा का विवाह होना प्रसिद्ध है । महाराणा सोकल ने तो रणमल की सहायता कर उसको मंडावर का राज्य दिलाया था । 4.




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