वैदिक साहित्य परिशीलन | Vaidik Sahitya Pariseelan

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Vaidik Sahitya Pariseelan by रजनीकान्त शास्त्री - Rajanikant Shastri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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क, ॐ : , मावृ-माषा में, जिसे हम बैदिक संसत कहते है, सवे गए दै तथा उन सवाँ की स्वना 5 सष्टि के झादि में वा किंसी एक काल में न होकर सहलो वषं मे मिन्न-मिन्न काल में हुई 7. हैं। योतों ऐतिहासिक तथ्य पर पर्दा डाल अन्धविश्वास कौ प्रश्नय देने वालों के लिए; कोई जवावदही नहीं है। । र . . वेद के ऋषि-कत होने के प्रमाण 9 ` बेद मंत्र किसी ईएवर के रचे न होकर ऋषियों, की ही निजी स्वनाएँ हैं, इसके कतिपय प्रमाण स्वयं वैदिक एवं लौकिक संस्कृत साहित्य में भरे पड़े हैं । निम्नलिखित . .... उद्रणों पर हृष्टिपात कीजिए:-- | | ( १) ऋषे मंन कृतां स्तोमैः कर्यपेदर्थयन्‌ गिरः । सोमं नमस्व राजानं यो य वीरभापतिरिद्रायेनदो परिव | ऋक्‌ ६।२१५।२०॥ ८.९) शिवां अङ्गिरसं मंजछृतां म्ृदासीत्‌ । सपिनरन्‌ , पूच्का इत्या म॑त्रेयत्‌ ।| तां° व्राऽ १३।३।२४५॥ ं | , ८३) नम करषिभ्यो मंत्रकदुभ्यः मंत्रपतिम्यो मा माशऋषयों मंत्रकतों .मंत्रपतयः पराहुः माहम्‌ ऋषीन्‌ मंक्तो मंजपतीन्‌ परादाम्‌ | तै० श्रा०८ १। १|| यु इतऊर्ध्वान्मत्रकतो 5धवर्युव 'शीते । यथं म॑रङतोषणीत इतिविशायतें | स्त्या ` शरौ २।१।३॥ | (५). तन्देवा काद्रवेयः रपं ऋषिम्‌ | । ० ब्रा० ६। १॥ 1 (६) श्रथयेषा मुह मंत्रझतोनश्यु: .स. पुरोहित . प्रवरास्ते प्रश्नणीरन, 1|श्ाप० श्री० २५।९०।१३॥ . . 1 | ¦ (७) म्तेत्रशौते । यथि मंत्रकतोइशीत इति ज्ञायते ।।गराप० श्रौ ० २५।५।६॥ . , (८) दिणत उदज्ग इलो मकारः ॥ मा ० सू. शेयर ॑ 44 ) दशिणतस्तिष्ठन्‌ मं्रवान्‌ ब्रह्मण , श्माचायविकाज्ञलिपूरयत्‌ ।।ला० ० सूज शबाना... | | , { , (१०) घुकेमं पाप मंत्र पुण्येषु इनः ॥ पाणिनि श्र ° ३।२।८६॥ जेसे---करमक्त,` पापक्त्‌ › मज्‌ , पुरक्घत्‌ इत्यादि । (९९) नव मंचको मंत्रेदूंरात्‌ प्रशमितारिमि: । पत्यादिश्यन्त द्वमे दृष्ट लद्दयभिद्‌ः - शराः ॥ रघुवंश १-६१॥ =` इन; कर, मे दर( १२) त्रपयग्रणीर्मत्र कृतामृषीणां ऊशग्रहुदे कशली गुरुस्ते । यतस्त्वयाज्ञानमशेष्रं {तं लोकेन चैतन्य मिवोष्ण रश्मेः | रघुवंश ५।४॥ | [इन बाहो उदरणें मै म॑नछत्‌, बा मंनकतः, मंत्रझतामू ,. मंभकार: श्रादि इसके विविध सान्तर झाए हैं जिससे सिद्ध होता हैं कि वेदमंत्र ऋषियों की ही रचनाएँ हैं, न कि किस 1म




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