मुस्लिम संत - चरित | Muslim Sant - Charit

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अबुल हसन नचूरी ,है।” आशइ्चयं से लोगो ने पूछा, “यह कंसे ?” बोले, ष्‌ मुत के लिए हमाम मे गया । एक शख्स बाहर से मेरे कपडे उ केन्य बाहर आकर देखा तो कपडे न थे । मैंने अल्लाह से कपडे मागे । उसी वक्त वह शख्स आया और मेरे कपडे मुझे देकर कष्ट के लिए क्षमा-याचना करने लगा।'”” |एक वार वगदाद मे आग लगी । बहुत लोग जल गये । एक अमीर केदो गुलाम भीउस आगमे थे) वहं अमीर उन्हे बचाना चाहता था । बोला, “जो कोई इन्हे निकाल लायगा, मै उसे हजार दीनार इनाम मे दगा ।” उसी समय नूरी उधर से गुजर रहे थे । विसमित्लाह्‌ कहकर यह्‌ माग के अन्दर गये ओर उन गुलामो को निकाल लाये। उनपर आग का जरा भी असर न हुआ । उस अमीर ने दो हज़ार दीनार इनके सामने रखे, मगर इन्होने नहीं लिये । वोले, “ये तू ही ले ले । मुझे इसी न लेने की वजह से मल्लाह ने यह अज़मत दी है । मैंने दुनिया को आखिंरत से बदला है।”कुदसिया के निवासियों ने एक आवाज़ सुनी--“हमारा एक दोस्त भयकर पद्ुुओ से भरे एक जगलमे है, उसे आबादी मेँ ले आओ 1” लोगो ने तलाश क्यातो इन्दी नूरी को एक कब्र के अन्दर बैठे देखा । आग्रह करके लोग इन्हे अपने साथ ले गये । फिर पूछा, “ऐसे मुकाम पर आप क्यो बेठे थे ?” बोले, “मुक्े सफर में कई दिन खाना नहीं मिला । मैं एक मुकाम पर पहुचा, जहा खजुर का बाग लगा था । मेरा नफ्स खश्च हुभा । उसको सजा देने के लिए मैने खजुर का वाग तकं करके यहा सकूनत इर्तियार कौ थी 1एकवार इन्होने श्रगारा हाथ मे लेकर मसल लिया । तमाम हाय स्याह्‌ हो गये । इतने मे इनकी दासी जतुना ने दरूघ-रोदी लाकर इनके सामने रखी । इन्होंने बगैर हाथ घोये खाना शुरू किया! खादिमा ने अपने दिल मे कहा कि यह्‌ तो वदतमीजी है । इतने मे शाही सिपाहियो ते आकर उसे गिरफ्तार किया जौर कहा, “तूने जेरजामा चुराया है । तुभे कोतवाल के पास ले जायेंगे ।” उन्होंने उसे मारना शुरू किया तो यह बोले, “इसे न मारो, जेरजामा अभी मिल जाता है।” इतने मे एक आदमी ने आकर जेर-




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