राम - किर्ति | Ram - Kirti
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
190
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१५सहमत होगे किं वाल्मीकि की लेखनी से उद्भूत राम का अस्तित्व था
ओर भविष्य मे भी सदा-सबेदा उनका अस्तित्व बना रहेगा । राम जसे
कत्तव्य-परायण पुत्रो, सीता जसी पतित्रता पलिनियों ओर लक्ष्मण जंसे
श्रातृभक्त भाइयो की भारतीय इतिहास मे कमी नही, लेकिन पुरात्तन-
काल के इस महाकवि की अनुपम ति के आगे उनकी आभा उसी
प्रकार धीमी पड़ जाती है जंसेकि चन्रमा की रजत ज्योति के बढते
हए प्रकाश मे चमक्ते हुए तारो की आभा फीकी पड़ने लगती है अपने
प्रश्रयदाता राजाओ की यश्च कीत्तिको अमर बनाने का अतीतमे कवि-
गण अपनी रचनाओ द्वारा बराबर प्रयत्नं करते रहे है, लेकिन उनकी
कृतियो को साहित्य के शद् सगीतमे एकं सुरीली पर अगम्य तान
जोडने से अधिक सफलता नही मिली 1 इसके विपरीत मानव-सभ्यता के
अस्पष्ट बाल्यकाल मे ओर इतिहास के उन अस्पष्ट दिनो मे, जिन्हे हम
बहुत-कु भूल चुके है, जिस काव्य-संगीत ने जन्म लिया वह दूरवर्त्ती
थाई देश सहित अनेक देशो के साहित्य-सगीत को अभी भी झकत कर
रहा है)थाई देश के रामायण-साहित्य मे एक विशिष्टता है । वह यह कि
रामायणः शब्द उसमे कही नही मिता और उसके रचयिता के बारे
मे भी सामान्यतः कोई कुं नही जानता । थाई लोग तो 'राम-कीत्ति'
को ही जानते है, क्योकि इसी रूप मे वहा रामायण का प्रचारं है। यह्
श्रेय तो थाई देश के छुठे राम राजा को ही है कि उन्होने राम-कीत्ति'के
मूल का पता लगाकर उसका पाण्डित्यपूणं विर्लेषण किया । तभी
जाकर राम-कोत्ति' के मूल रूप रामायण का पता लगा भर उसके
रचयिता वाल्मीकि के बारे मे मालूम हुआ । लेकिन तब भी यह जान-
कारी उन्हीतक सीमित रही, जो थाई देच के उच्च साहित्य मे चिशेष
रुचि लेते है। जहातक सर्वसामान्य का सम्बन्ध है, उन्हे अभी भी
राम-कीत्ति के मूल नाम और उसके रचयिता के बारे मे कुछ भी पता
नही है।कोई लोकप्रिय गीत जब लोगो को अपने माधुयं से मोह लेता
है और वे उसके सम्मोहन में फस जाते है तो धीरे-धीरे इस बात
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