धूप क्यों छेड़ती है | Dhoop Kyon Chhedati Hai
श्रेणी : काव्य / Poetry

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
469 KB
कुल पष्ठ :
82
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मै देशद्रोही नही हूं
मैं मानता हूं
मैं स्वतन्त्र भारत की देह पर फोडा हूं;
लेकिन मैं अजेय नहीं हूं ।
बस, अपने भीतर दर्द रखता हूं;
इसीलिए अछूत हूं,
दोपी हूं
मैं अक्षम नही हूं,
भूखा हुं ।
भले ही आपने मुझ पर-
शरीवी की रेखा पटक कर,
छुपाने का असफल प्रयास किया है ।
फिर भी मै
तुम्हारे लिए भय हूं,
कि, कोई दवा पड़ा है ।
सामने न सही
अपने ही मस्तिप्क में
मुझ रो हाथ मिलाते हो तुम ।
घृष क्यों देती है 0 17
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