| An Banchya Ankar.

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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गीतमारा आंसू पीग्यो ऊमर को रेतीलो तोर रे, तो भी नही घुपी यादाँ की या घू घठी लकी र रे ॥।उधडी मिली म्हूंन” पगथद्ियां गेला प' चोराया प5 हाल घडी उट चल्या भस्या सेनाण मित्या हर छायापःऽ आसा का मृगजद क' पाछ' भटके मन की पीर रे ॥ याकदी नहीं आया म्हारे आंगण तो तुलसी पूजवा, सपनां क दार' भौ आतां व पग लाग' धूजवा, नं मदिर में मिल' न मुंडा सू वोल' तसबीर रे ॥ या”कद की वोई वेल चमेली हाल न आया फूल रे, कद का म्हारी भून्यू उपर र्या वादा भूल रे, कद सू सिमटूयौ साम्यो मन को पडियो पचरग चीर रे ॥ या“तात तव दद ज्य टमक' ये गीतां रा बोल रे, दोजुगवड़ी कटाणौ वणगोवहूंन तोभी खोलरे, कसक' तो भी काइ न पाऊं यो दो घार्‌यो तीर रे ॥। सारा आसू पीग्यो ऊमर को रेतोलो तौर रे, तो भी नहीं घुपी यादा को या धूधलो लकीर रे ॥।१अ




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