विज्ञान के चमत्कार | Vigyan Ke Chamtkar

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Vigyan Ke Chamtkar by छबीलाल लाहौर -Chhabilal Lahaur

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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4 4 { ११ 1 छाज विक्लान एक नये संसारकी रचना करने पर कटिवद्ध है । न जाने दस हज़ार; वीस हज़ार, पचासहजार, अथवा लाख दोलाख चषासें क्या ९ झद्ध त क्रान्तियां होंगी । विज्ञनने समय तथा दूरी को विल्कुल कम करते हुए हमारे संसार को संक्षिप्त चना डाला है | ाज यदि संसार के किसी भी भाग सें गड़वढ़ दो, तो सारा संसार उससे प्रभावित हुए विना नदीं रह सकता | विज्ञान के आविष्कार, युद्ध शांति, व्यापार तथा पदार्थो के भाव चादि सभी -ते अन्तराषटरीय रूप धारण कर लिया है । श्राज वैज्ञानिकों पर नास्तिक अथवा काफिर होने का फ़तवा देना भी काफी साहस का कास वन गया है । झाजकल के वैज्ञानिकों की प्रयोग शालायें संसार भर के धर्स मन्दिरों तथा सभी धर्मा के लिए प्रतिदिन एक न एक चैलेंज देती रहतीं हूं । धर्मधिकारियों के साथ छेड़- छाड़ अथवा अझठखेलियां करने सें तो विज्ञान को विशेष छानन्द श्राता ह । कमी पष्ठ पक्षियों तथा सनुष्यों के लिङ्क परिवतेन थीत पुरुष को खी श्रथवा खी को पुरुप वनाकर,. श्रौर कभी काले कोयले से इनेत फिनायल अथवा सफेद चीनी लिकाल कर श्मौर कभी परमशु वम जैसे घातक पदार्थ के आविष्कार द्वारा दयालु परमेश्वर तथां उसके एजण्टों कौ परेशान करता रता है । इस छोटे से संग्रह में विज्ञान के केवल छुछ दी श्ाविष्कारों ङा वणन किया गया है! इन्हें केवल नमूना मात्र दी समसा जाये श्रौर अन्य झसंख्य विचित्र तथा श्वदूभुत 'झाविप्कारों का स्वागत वड़ी उदारता तथा गंभीरता से किया जाप ।




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