वन्ध्याकल्पद्रुम | Vandya Kalpdrum

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : वन्ध्याकल्पद्रुम - Vandya Kalpdrum

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about रामेश्वरानन्द जीवानन्द शर्मा - Rameshwaranand Jeevanand Sharma

Add Infomation AboutRameshwaranand Jeevanand Sharma

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
९६. वन्ध्याकत्यहुम । +, व ¶ घीमा इनके पानीको देवे खटार्ईका देना हानिकारक रै, ठेकिन जो रोगीके गछेम \ खुरखुरापन होय तो खट्टी चीजें कदापि न देवे । और जौका सत्तू जुढाबकी दवाके 2 साथ पिछावे और बाकी वहीँ उपाय हैं जो कि फेफडेकौ रक्षाके विपयर्म ऊपर चिति * गये हैं । इस बातका ध्यान रखे कि खसरेमें तुरंजवीनका देना निषेध किया गया है ओर 4 हकमलोग कहते हैं कि खसरेगें तुरंजवीन देनेसे ऐसी हानि पहुँचती है कि जैसे .गर्म प्रकृति- : १ वालेको शहदके देनेसे हानि पहुँचती है और घबराहट जी. मिचलाना और ५ वेचैनीको बढाता है | इसी प्रकार बनफशा जर इककर्पेचका पानी देना खसे ¢ वर्जित हे क्थोंकषि इसमे मी जी मचछाता है और घबराहट उत्पन होती है । आरोग्य मनुष्य जो इस म्जसे बचना चाहें उनको हिदायत । आरोग्य सनुष्योकों उचित है कि इस रोगसे वचनेके छिये सावधान रहें साव- ‰| घानीसे रहने पर जो चेचक और खसरा निकले भी तो बहुत ही कम निकछता है | ओर जव जिस शऋतुमें चेंचक और खसरा उत्पन्न होनेक चिद दढ जायि तो जो ठडके ्डकी तीन जौर १४ वर्धकी उमरे दर्भियानम होय अर कमी उनके जन्मे ठेकर चेचक ओर खसरा न निकटा होय तो उनका फम्द॒खोठे ( मगर जो वालक १२ | (1 प ष्टः स्ट, सारसे उपर होय उसकी फस्द खोरे ओर जो वारह स्मरते नीची उमरका होय उसके पछने छगाकर रक्त निकाल देवे और इस ववाकीं फसल कै रही हाय तो ¦ & जीर १९ वैकी उमरे दर्ियानके वाख्कोके शरीरम जोक जहां तहां छगाकर ‰ थोडा खून निकाले और इस बवाकी मौसममें सब मलुष्योंको सावधान रहना चाहिये 5 ठंढे भोजन तथा ठंढे शरबत्त जैसे कि शरवत उन्नाव, सिकंजर्वान नीबू, इंसबर- 5 गोल, बूरा कन्द गाजरका शरबत, वंशलोचनकी फेंकी, कापूरकी टिकिया इत्याठिका ‰ खाना छामदायक है । और जिस मौतममें चेचक निकलनेकी फसठ दोय उन दिनेमिं ¦ 4 चढत जवानीके डके लडविर्योको जिनके चेचक ब खसरा जन्मसे न निकटा होय ¢ .4 उनको दूष, मिठाई, शराव, मांस, वैंगन आदि गर्म भोजन और गर्म भेवाओंसे बचना मु चाहिये, जो कि खूनेको बढ़ाकर जोदा पैदा करती हैं | जैसा कि छुद्दारा, खरबूजा, ५ लिन का चर अंगूर इत्यादि खाना चन्द्‌ कर द्व 1 इसी प्रकार परिम, ५ कसरत, ग, धूप, आगसे तापना, गर्मी, खाक, धूलसे वचना वन्द्‌ पानके ( न बचना चाहिये और कमी सर मेवाओंके पानी तवीयतको नमं रखे और ५ तवीयतमे मरनणं न होने पावे ठंढे शाक ` जीर खट्टी चीजें छामदायक हैं | मांसको 4 > लटा और हरे 'शाक मिछाये ब्िदून' न खाना चाहिये । 4 4 के | श्यै न्न्फरन्छनन् ध -वशरोचनकी टिकिया विधि ! फखवके प्रर, चूक कनन के बीज प्रत्येक ३ मसे, अरनी निशास्ता, वंशलोचन




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now