मेघदूत | Meghdoot

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कालिदास - Kalidas

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केशव प्रसाद मिश्र - Keshav Prasad Mishr

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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काव्य और कवि के सम्चन्ध में दो बातें मेवदूत काव्य-संसार का एक ्द्दितीय व्यक्ति है । प्रातिम श्ौर प्रत्यत्त उमयविध गोचरों की जैसी रमखणीय एकात्मता मेघ- दूत में है वैसी श्रल्य्र कद्दीं नहीं । विज्ञात का विज्ञान र विज्ञात का श्विज्ञान जैसे न्रह्मविद्‌ का लक्षण दे वैसे ही क्रान्त- दर्शी कवि का भी। जिस कवि के चित्त की पहुँच सपघुमतो भूमिका तक है जिसे पार्थिव रज भी मघुमत्‌ प्रतीत होने लगता है बद्दी ऐसे मघुर कविकर्म का सष्रिकर्ता दो सकता है । मघुसती भूमिका चित्त की वदद विशेष श्ववस्था है जिसमें बितर्क की सत्ता नहीं रद्द जाती। शब्द श्र्थ और ज्ञान इन तीनों की प्रथक्‌ प्रतीति बितके है। दूसरे शब्दों में चस्तु चस्तु का सम्बन्ध ्ौर वस्तु के र.म्बन्धी इन तीनों के मेद का करना दी घित्क दे । जैसे यद्द मेरा पुत्र दै इस चाक्य से पुत्र पुत्र के साथ पिता का जन्यजनकसम्वत्थ और जनक होने के नाते सम्बन्धी पिता इन तीनों फी प्रयक्‌ प्थक ग्रतीति होती है। इस पार्थक्यानुभवर को प्रत्यक्ष भी कहते हैं। जिस श्वस्था में सम्बन्ध श्र सम्बन्धी घिलीन हो जाते हैं केवल वस्तुमात्र का मिलता रहता दैं उसे पर अ्रत्यद्य या निर्षितक समापत्ति कहते हैं। जैसे पुत्र का केवल पुत्र के रूप में प्रतीत होना । इस प्रकार अतीत होता बुझा पुत्र प्रत्येक सडदय के चात्सल्य का ालस्बन हो सकता है। चित्त की यह समापत्ति सान्विक घसि श्र




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