आधुनिक राज्य का सुरक्षातंत्र | Adhunik Rajya Ka Surakshatantra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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य झाधुनिक राज्य का सुरक्षातंत्रपरन्तु राजनीतिक सिद्धान्त ग्रोर व्यवह र में यह तत्त्व इतना महत्वपूर्ण होता है छि यह मपने-प्रापमें एक ग्रलग क्षेत्र बन जाता है मोर इतिहास में राज्य के नागशिकट अथवा राजनीतिक झरों द्वारा इयका उन्वत एव कुगनन॒ नियव्ररामदा एर सनम्वा बना रहा है1 सन्नाद क्लाइियस के काल में सर ६९ इ० में जब प्रिटोरिम्रन याहं (वनभ ठण्ड) ने रोम वा राज्य विदाखन मचे ऊद दोची सथाने वाय को नीलाम करने का झधिकार ग्रहण किया झयदा इसमें भी पूं १८४ ई० ९० जव शक्तिशाली मौयें साझाज्य के सेनापति पुप्यमित्र ने सम्राट वृहदय को मारकर सिंहा- सन पर मधिकार कर लिया तब से राजनोठिक सिद्धान्दवेत्ता और साम्राज्यनिर्माता इस जटिल समस्या का समाधान खोजने का प्रयत्न करते रहे हैं । घ्ॉटोमन साम्राज्य के जानिसारियों है न 10 0० हणफार) हिटलर गौर मुसोलिनी को छोड़ मी दे, तो भी हाल ही में सप्तार में न केवल लातिन श्रसरी का में वरद मिल्न, मघ्य पूवं, श्याम या पाकिस्तान, लामो भोर वर्मामें कटं ननि भान्तियाँ हुई हैं । प्रतः रसना को केनद्रौव समस्या मुचवः एक धोर्तो रागक नागरिक प्र्यस, मचे ही वह संयुक्त राज्य झमरीशा का राष्ट्रपति हो श्रयवा संसदीय सोकर का प्रधानमंत्री, भर दूसरी श्रोर पेशेवर सैनिकों, जिनमें उच्च सैनिक मधिकारी भी सम्मिलित हैं, के भापसी सम्बन्यों पर ध्ाधारित है। पहा हम झेवर नागरिक झौर संनिक्ष लेत्रों के सम्वस्धों तया राज्य के उन श्रगों का, जिन पर रक्षा कायं के कुशल सथालन के लिए ये सम्बन्ध माधारित हैं, प्रध्ययत करेंगे । इस सम्दन्य निर्ारण में सेनाप्यक्ों की समिठि (एंड ऽमी (ण्या 16९) वटी ही “महत्वदूों भूमिका झदा करती है बोर राजनीतिक सरचना में इयको हिंयति प्रौरबाय राज्य दी प्रति प्रौर स्दसाव पर इतना प्रभाव हाचते हैं कि थे ही इने खच्चभ्यो मे. लोकतव्र चयदा ठानाशाही का रूप देठे हैं, अतः उस समिधि विपयक लेख (107०) के रूप थे हो इस अव्ययन का म्ारम्न हुधा । श्रव. सनि संगठनहे जम साग दो डो इस सम्दस्ध को प्रमादित नहीं करते तया राज्य के उन राजनी- पिंक म्रंगों को भी, जो सनिक प्रानो दे खमे मे नदी प्रे इव धन्ययन क्षेत्र केचार रखा यदा है । इस वियय में झध्ययत वा विस्तृत झेद्र जिसका सम्दन्य राज-१,९.०६ चनि दोनो केः वोच सम्बन्य से हे पृष्ठ ५ पर दिए गए रेनाचिय द्वारा स्पप्ट किया गया है ।„_ श्य रेवाचिय में दूत प भ्रौर्‌ हेव म मगः रजनोतिरु भौर संनिदर संगठनों के सतगाप्रउय सेव प्रकट करते हैं । ठ पर प्रेरित संदंघानिक सम्पर्क जो सनक सपद्न शो निर्या बचत करने तया इसे लोकेच्छा के श्रघोन रखने के प्रभावी यंत्र धन रे. इस पुस्टक में “नगरिक भ्द के घदोग को ब्यरदा करने को भवरपडदा दै। इसका भसे. नोक्त पया नमक खेदो के हिए नही टुया दे । स्तेिक' देवद संदर्म में नगरेक 'राजनो हद का हो रुरावादंड इं ।




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