सरल राज्य - शासन भाग - 2 | Saral Rajy Shasan Bhag - 2

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
100
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ १० |पाठ हे
नागरिक ओर उसके अधिकारनागस्कि का झध--साधारण बोलचाल की भाषा में
नागरिकः ( 0४९९ ) शब्द कां अर्थं (नगर का निवासी है;
परन्तु शास्त्रीय दृष्टि से उन सब लोगों को जो किसी राज्य
( 3७8७० ) में रहते हों तथा राज के प्रति अपने कतंब्य का
पालन करते हुए श्रपने राज के शासन-प्रबंध में भाग ले सकते
हों नागरिकः कहते है । इस व्याख्या के श्रनुसार किसी छोटे से
गाँव मे रहनेवाला मनुष्य भी उसी प्रकार नागरिकः है जिस
प्रकार किसी षडे गव में रहनेवाला । ' नागरिक” को
श्रा मी कह सकते है । (नागरिकः होने के लिए धर्म, जाति,
वणं शादि की भिन्नता बाधक नहीं हो सकती । हिन्दू, मुसल-
मान, इसाई, पारसी श्रादि जो किसी राज में रहते हों श्नौर
जिन्ह अपने देश या राज के शासन-प्रबन्ध में भाग लेने का
धिकार होवे उस देदा के “नागरिक हैं ।नागरिक के गुण
प्रत्येक नागरिक जन्म से ही अपने साथ कुछ अधिकार
लेकर संसार में भ्राता दै। ये अधिकार उसे राज के द्वारा दी.
मिलते हैं ।
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