नाटक और कहानियाँ भाग - 2 | Natak Aur Kahaniyan Bhag - 2

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Natak Aur Kahaniyan Bhag - 2  by Arvind Kumar - अरविंद कुमार

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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352 नाटक और कहानियाँ घरपर नहीं होते तो मुझे कभी-कभी मारती भी है । हां, उसके दांत जरूर तोड दौ । मे बहुत खु होऊंगा 1 अलमुईन -- मेरा हसमुख शैतान । खातून -- तुम उसे अपनी मासे नफरत करना सिंखाते हो * हम सभीमें दोजख- की आग छिपी है, लेकिन वह इसानी शर्मो-हया और अल्लाहकी मेहरबानीसे मुहरबन्द है। लेकिन तुम ! तुम उस ताले और मुहरको तोड़कर नरककी भरपूर लपटोको उठाना चाहते हो, आम इंसानों में पाये जानेवाले घुंएके बादलों - से तुम्हारा जी नही भरता। यह न समभना कि यह नैतानकी पुडिया मिफ अपनी मसे गैर कुदरती वगावत करके रुक जायगा! तुम्हें इसके लिये पछताना पड़ेगा । (जाती है) फरीद -- अव्वाजान, लड़की, उफ, क्या लड़की है ! लड़कियोंमें वस एक है ! मुझे वह लडकी खरीद दो । अलमुईन -- अरे फादते उल्लू ! कौनसी लड़की ? फरीद -- गुलामके वाजारमें दस हजार दीनारमें मिलती है । क्या हाय हैं! क्या आसे है । कैसे पुटे और कंसे पांव है ! मेरे वाजू उसके गर्द धूम जानेके लिये वेचैन है अलमुईन -- मुहव्वतमे मदहोश परिदे मेरे दिलफेक सलोने, तुमने भी तौ हमारे वजीरके नूरे नजर शोख नूरु्दीनसे कम लड़कियोंको नही जीता है। मेरे डाकू वुमने मुहरें तोड़ी हैं और ताले चटकाएं हैं। . फरीद -- यहे आपकी ही तो देन है और आपने ओर मामे मेरे ऊपर इतना खराब कूवड लाद दिया है कि लड़कियां मुभ देखकर ताने मारती ह । मुभे सिर्फ अन्यी लड्क्ियोमिं ही मौका मिल सकता है । छि: शर्मकी वात दै । अलमूरईदन -- कुवड़, अपनी वादीसे कंसे मुहव्वेत वसूल करेगा ? फरीद -- वह मेरी वांदी होगी इसलिये मुझसे प्यार करना ही पड़ेगा । भलमुईन -- कुवड़े, चल वाजी लगा लें । तू उससे निकाह करेगा ? क्या सुलतान- कौवेरी पर आंख लगी है ? अलमुईन -- कया, वजीरकी, मेरे खास दुष्मनकी भतीजी ! अरे मसखरे, वहां तेरी थादी नहीं हो सकती । \ फरीद -- मैं भी उनसे नफरत करता हूँ. और कुछ हृदतक इस कारणसे भी उससे शादी कन्गा। शादी करके उसे दिनमें दो वार पीटा करूंगा और उनको खवर भेजता 4




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