काव्य रूपों के मूलस्रोत और उनका विकास | Kavy Rupon Ke Mulasrot Aur Unka Vikash
श्रेणी : काव्य / Poetry

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
37 MB
कुल पष्ठ :
608
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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चतुथ खड
बन्धाबन्ध कान्य
त्रयोदश म्रध्याय : बन्धावन्ध काव्यभ्मौर् उसके प्रकार ५३१बन्धाबन्ध काव्य का स्वरूप, मिश्र काव्य उसके श्नन्यान्य
रूप, नाटचात्मक, स्वानुभूति प्रधान, श्रास्यानप्रधान; मिश्चकान्य
के विभिन्न रूपों का स्वरूप (१) नाट्यात्मक --गीति-नाटय
श्र उसके. तत्व-भावात्मक वस्तु, कथोपकथनात्मक डौली,
श्रात्माभिव्यंजना ; श्रंप्रेजी के (लिरिकलड़ामा) का प्रभाव,
हिन्दी के गीतिनाट्य, प्रसाद का करुगालय, महाराणा
का महत्त्व, गुप्त जी का अ्ननघ; उदयंकर भट का मत्स्स-
गन्धा, राधां ग्रौर विश्वासिव्र; निराला कौ पच्वटी, केदार-
नाथ मिश्र “प्रभात” का संवर्तः नटकीय गीत, उसके दो
प्रकार, स्वगतकथनात्मक, कथौपकथनात्मके, भ्रग्रेजी का
““डभेटिक मोनौला ` हिन्दौ के कथोपकथनात्मक नाटकीय-
गीति, (२) स्वानृभूति प्रधान, उसके दौ रूप श्रात्म-
निवेदनात्मक, द्वापर श्रौर श्रतिगीतात्मक यशोधरा, (३)
ग्राख्यानप्रधान, हिन्दी के प्रास्यानप्रधान मिश्रकाव्य, गुर्करल,
वाप ।
उपसंहार ध ति .... ५७७सहायक ग्रंथो की सूची .... का .... ४८२
. संस्कृत के सहायक ग्रंथ ।. हिन्दी के सहायक ग्रंथ ।. हस्तलिखित ग्रंथ ।. पत्र-पत्रिकाएँ ।५. अंग्रेजी के सहायक प्रय ।६. संस्कृत साहित्य पर भ्रंग्रेजी के ग्रंथ ।०८ ५ € „~<
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