काव्य विवेचन | Kavya Vivechan
श्रेणी : उपन्यास / Upnyas-Novel

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
16 MB
कुल पष्ठ :
243
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)६] [ काव्य विवेचन२- मुसकाता संकेत भरा नभ
अलि क्या प्रिय आनेवाले है ?
-महादेवी
आधुनिक ढग से प्रस्तुत वर्षा ऋतु का उदाहरण-
जागी किसकी वाष्पराशि, जो सुने में सोती थी ?
किसकी स्मृति के बीज उगे ये, सृष्टि जिन्हें बोती थी?
अरी दृष्टि एसी ही उनकी दया दृष्टि रोती थी ?
विद्व-बेदना की ऐसी ही चमक उन्हें होती थी ?
-गुप्त जी
ज्योह्स्ना का उदाहरण--
१- कालिमा घुलने लगी घुलने लगा आलोक,
इसी निभूत अनन्त मं बसने लगा अब लोक,
इस निज्ञाम्ख को मनोहर सुधामय मस्कान,
देखकर सब भूल जायें दु:ख के अनुमान ।~पर साद
२ नीचे दूर दूर विस्तृत था
उमिल सगर व्ययित अधौर ।
अंतरिक्ष में व्यस्त उसी सा
रहा. चन्द्रिका-निधि गंभीर ।
-प्रसादसखी द्वारा नायिका को विभूषित करने का उदाहरण-
माँग संवारि सिंगारि सुबारनि बेनौगृही जु छवानि लौ छावं।
त्यौ पद्माकर' या विधि भौर ह सानि सिगार जु स्याम को भावं ।
रीोझे सखी लखि राधिका को रंग, जा अंग जो गहनों पहिराब ।
होत यो भूषित भूषन गात ज्यो डॉकत ज्योति जवाहिर पावे ॥
उद्दीपन के प्रकार-
उद्दीपन विभाव विषयगत और आश्रयगत दोनो प्रकार का होता है ।विभिन्न रूप वाले होने के कारण श्ुगाररसमे प्रेमी ओर प्रेमिका दोनोकी ओर से उद्दीपन होना अनिवार्य है । य्रथा-
दयामा सराहति इयाम की पार्गाहू इयाम सराहत श्यामा कौ सारो
एक ही दपन देखि कहे तिय नीके लगों पिय प्यो कह प्यारी ।
यहाँ दोनो की चेष्टायें उद्दीपन का का्यें करती हैं ।
उद्दीपन विभाव के दो भेद होते हैं-विषयगत (पावस्थ) और बहिगंत (बाह्य) । पात्र के गुण, पात्र की
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