मंजरी ऑपेरा | Manjari Opera

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Manjari Opera by योगेन्द्र चौधरी - Yogendra Chaudhary

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मंजरी ऑपेरा | १४ गोरा बाबू और मंजरी न जानते हों--और सिर्फ वे ही वयों, दल के प्राय: बहुतेरे लोग इसके अन्दरूनी अर्थ को समझते है । कॉमिक ऐवटर वोका वादू दल छोड कर चला गया; वह कहा करता था, “चाहे हरि के चरणों में तेल लगायें या उन पर तुलसी ही चढायें मास्टर साहब, आपको कंस रावण की भूमिका में ही उतरना पडेगा ।* रीतू बाबू कहते, “वात तो तुमने बिल्कुल सही कही है वोका । हरि अपना पार्ट किसी को नहीं देता ।” वोका कहता, “देखिये न, मुझे बिल्कुल बोका (बेवकूफ) सजा कर बाप के द्वारा दिये गये नाम को ही उड़ा दिया । सचमुच ही मैं बेवकूफ ही हो गया । आप जिस गीत को गाते हैं वह अक्षरशः सही है । लीलामय नटवर हरि जिसुको जिस रूप में सजाते हैं, उसे उसी रूप मे सजना पड़ता है 1 ˆ ` उस दिन उस गीत की दो पंक्ति हे हए फीद-यक लेरे क होर्कपर पहुँचा, गोरा बाबू ने कहा था, “हरि तो मुसीवत में फंसे गंपार्है मार्सिटर साहव । सजाने लायक आदमी ही नहीं मिल रहा है । बात मासूम दै? सुन चुका हूं । कई दिन यहाँ नहीं था । घर यानी श्रीरामपुर गया था--वहाँ से वावा तारकेश्वर । परसों वापस आया हूँ । बोका से सब सुनने को मिला ।' बहू आपको कहाँ मिल गया ?” *वता रहा हूं । भरे ओ शिवनन्दन, कहाँ है तू ? एक गिलास पानी पिला । हाँ, तो कल एक बार अभिसार में निकला था । मिनर्वा थियेटर के पास आमने-सामने मुलाकात हो गयी । वह भी बिल्कुल दरवाजे के पास । वह निकल रहा था और मैं अन्दर जा रहा था । मैंने कहा. कौन, वोका ? वोका ने चरणों की ध्रूल लेकर कहा -- हाँ, दादा मैं ही हूं ।' मंजरी माकर खड हुई, उसके हाथ के शीशे के प्लेट में मिठाई और झकमक मजे हुए मुरावावादी गिलास मे पानी है । स्नान हो चुका हैं, सिर पर हत्का घूंघट है, ललाट पर सिन्दूर की वेदी । पहरावा फारसर्डागा कौ सादी 1 कुल मिला कर मंजरी बडी हो प्रसन्न दौख रही है 1, मंजरी लम्वी-छरहरी है, उसकी सेहत ठीक है, उम्र सत्ताईस-अंद्राईस, मगर उम्र की तुलना में गम्भीर दीखती है! खूप, वय घौर तरुणाई में कोई कमी नही है, लेकिन तरुणाई की चंचलता नहीं है 'उसमें । प्लेट और पानी का गिलास नीचे रख कर बोली, “आप जेसे ही पहुँचे, शिवनन्दन से मैंने कहा--जाकर मिठाई और पानी दे आ। मेरा हाथ फंसा हुआ है । लेकिन वह खीरा-प्याज . ~ बैठ गया है । मास्टर साहुव का नाम लेकर कहा--वे आये हुए हूँ। सादे पानी से




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