भारत का इतिहास | Bharat Ka Itihas

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Bharat Ka Itihas by रोमिला थापर - Romila Thapar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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की साक्षी प्रस्तुत करते है । इसके पश्चात्‌ एक लम्बे अझरसे तक विकास मद गति से होता रहा जिसमे प्तिम समय मे जावर तीव्रता आयी श्रौर उसकी परिणति २३०० ई० पु० के लगभग सिधु घाटी की श्रालीशान सम्यता श्रथवा नवीनतम नामकरण के अनुसार हडप्पा सस्थति के रूप मे हुई । हडप्पा की पूववर्ती सरझतिया हैं वलू- चिस्तानी पहाडियो वे गावा मे प्राप्त नल सस्कृति मकरान तट से तेवर के मुहाने तक फैले गावो वी कुत्ली सस्कृति श्रौर राजस्थान तथा पजाव वी नदियों के किनारे वसे कुछ ग्राम-समुदायो की सस्कृति । प्राचीन सम्यताश्रो मे क्षेतफ़ल की दृष्टि से हुडप्पा सस्ट्ति का विस्तार सबसे अधिक था । इसके अन्तगत न केवल सिघु का मैदान पजाब श्रौर सिघ वल्कि उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी मारत मे काठियावाड तक के प्रदश थे । यह मूलत णुब नागर सस्कृति थी जिसकी सत्ता के केद्र दो नगर मोहेजोदाठों तथा हडप्पा ये । इन दोनो नंगरा में पाये गये विस्तीण श्रन भण्टारो से पता चलता हे वि इनका सरक्षण गाव की अतिरिक्त पंदावार से होता था । श्राय का दूसरा साधन इस उपमहाद्वीप के उत्तरी तथा दक्षिणी क्षेत्र के शान्तरिक व्यापार श्रौर हडप्पा सस्क़ति के जोगो तथा फारस की साड़ी श्र मेंसोपोटामिया के लोगा वे बीच यापौर्‌ की उन्नति से होने- वाला लाभ था । इन नगरो मे उनत नगर नियोजन एवं सगठन की धारणा वा साक्ष्य मिलता है । प्रत्येक नगर दो क्षेता में बेटा हुश्रा था--एक नगरकोट जिसम नागरिव और धघामिव जीवन की श्रावश्यक सस्थाएं स्थित थी श्रौर दूसरा श्रावासीय क्षेत्र जहा नगर की झ्रावादी रहती थी 1 हुडप्पा सस्कृति के बहुसरयक झ्वशषेपो मे सबसे श्रधिक उलभन मुद्राओो मे पैदा वी है--छोटी चपटी वर्गाकार या चौकोर वस्तुएं जिन पर मानव या पु आइतिया श्रकित है श्रौर कुछ लिखावट भी है । इनकी लिपि को झ्रमी तक पढ़ा नहीं जा सका है श्राशा हैं कि जब श्रन्तत इनको पढा जा सकेगा तो इनसे दिलचस्प जानकारी उपलब्ध होगी । ऐसा प्रतीत होता है वि ये मुद्राएँं जिनकी सरय। लगमग दो हजार है व्यापारिया वे प्रतीक चिह्न है भ्रयवा यह भी सम्मव है कि इनका सम्ब थ ग्रामीण उपज से रहा हो जो सगरो मे लायी जाती थी । ईसा परव वी दूसरी सहसराब्दी के पूर्वाद्ध मे सिघु घाटी के प्रदेश पर श्रपेक्षया कम सम्य लोगा ने श्रघधिकार कर लिया था जिसके कारण हडप्पा श्रौर परवर्ती श्राय सस्क़ृति के बीच राजनीतिक निरन्तरता में ब्यवधान उत्पन्न हुआ 1 १७०० ई० पु० तक हडप्पा का छ्लास हो चुका था शरीर १४५०० ई० पू० बे लगमग ईरान से भारतीय श्रा्यों के प्र्जजन के फलस्वरूप उत्तर पश्चिमी भारत थी सास्कृतिक पृष्ठभूमि में कुछ नयी विशेषताझो का. समावता हुमा । उपमहाद्वीप के इस क्षेत्र का सिधु मदी तथा हिदूकुश पवत के उत्तर और पश्चिम के क्षेत्रा से सम्पक हमेशा वना रहा । कई वार यह उनकी राजनीति में भी श्रात्मसात हुआ . पिछने टिना हुई खुदाइया से कई नगरो का पता चला है--सिधघ मे कोट दीजी राजस्थान मे कालीवगन पंजाब में रोपड ओर गुजरात से लोधल का बदरगाह-नगर । लेविन पहले के दो नगर सदाधिक महत्त्व श्रतात होत हैं । १७




User Reviews

  • komalsahu4916

    at 2019-04-07 05:00:15
    Rated : 8 out of 10 stars.

    Romila thapar ki class 6ki ncert

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