भिक्षु जश रसायण | Bhikshu Jash Rasayan

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Bhikshu Jash Rasayan by छोगमल चोपड़ा - Chhogamal Chopada

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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= भिध्यु जश रसायण द (६) मारीमात्त 'घणा सुखदाय । समसकी लागा पजर । पाय रे ॥ म० ॥ ३ ॥ वीरभाणजी पणि तिशवार। घ्ादरथा मिक्ख चयण उदार । श्ावे सोजत शहर मार रे ॥ म० ॥ ४॥ बीचे गाम नान्हा जोणी ` सोय । दोय साथ किया शवकललोय । सीख इश पर दीधी जोयरे ॥ म० ॥ ५॥ घौरभाणजीने कहे ' वाय । जो थे पहिलां जाबो यु पाय । तो या बात . म करभ्यो काँय रे ॥ म० ॥ ६॥ पहिलां बात सण्यां ` मिड़काय । सनखश् हुवे सन मांय । तो पढ़े सम- साया दौरा जायरे ॥ म० ॥ ७ ॥ मेम सो ते ापां रा धुर है । मन ष्च्यां समसणा दुकर है। विग- ड्ियां पछें काम न सरहै रे ॥ स० ॥ ८ ॥ कला विनयं . करी हू कहस्यू । दिल श्रद्धा घेसाड़ी देखू' । युक्ति सू समसकाइ लेसू रे ॥ म० 1 ॥ स्वामो एम स्याने समम्छाया । कीरभाणजी ्ागच आया । रुषनाथजी सोजत पायारे + म ॥ १०॥ कर्जोड़ोमे बन्दना काधी । पूछें द्रव्य गुरु घसिद्धि । सायांरो शुक्ला मेट दीधीरे॥ मः ॥ ९१ ॥ चीरसाणजी बोस्या बायो + भावा त्तौ साचो भेद्ज पायो । मन शङ्क हृवे तो मिटायो रे ॥ स० ॥ १९ ॥ अधाकर्मी थानक अशुद्ध | आहार । बिन कारण निरथपिरणड वार । ापें भोगर्वा |




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