श्री कानजी मतखंडन | Shri Kanjee Mat Khadan Ac 522

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ५ ) पद्धति की श्रवदलना श्रौर श्रविवेक समभतादहं । इस स्पष्टीकरण से उनका अनादर से नहीं समता हूं, अर इसे व्यक्तिगत शआक्षप भी नहीं मानता हू । जिस रूप में बे हैं उतना मै उनका आदर करता हू । में तो डदय से चाहता हू कि वे एक सच्चे दिरास्वर जेन बनकर शास्त्रानुसार प्रवचन करे और उसी आगम की मान्यतावाले दिगस्बर जैन बनावें । तब वे एक विशिष्ट गणनीय सच्चे आदरणीय सत्पुसष बन जायेंगे । म'रेना (मध्यभरेश) मक्वननाल वास्त्री दि? १० १.५५




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