कविता - कौमुदी | Kavita Kaumudi

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Kavita Kaumudi  by रामनरेश त्रिपाठी - Ramnaresh Tripathi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(४ ) के इतने गोले मारे कि बंटादार कर दिया, जोर सिफारिश नै भी सबही छकाया । व परित बासङ्ष्णा भष, , , शद को आकर्षण. शक्तिं न्यूटम कौ माकषण शक्ति से -खउवभात भी कम सटी कटी जा सकती । बल्कि शेध की “श्स शक्ति को न्यूटन की आकषंण .शक्ति' से विशेष कहना चाहिये । इस लिये कि जिल आकषण _ शक्ति को, न्यूटन ने कट किया वह केवल प्रत्यक्ष मेँ काम दे सकती है ।. परिडत भरावीरभसाद द्विवेदी ५ उनके कथन का अवतरण देकर मल़िनाथ ने ,ज़न्हें -फट- कार यता है और लिखा है कि प्रसंग भी देखते हो या मन- मानी हाँकते हो । तुम्हें इस प्रयाग को सही साबित ही करनां है तो पाणिनि-व्याकंरण के पीछे' न॑ ` पडकर ओर व्याकरण देखो । ( किराताजनीयः ) अनाजं महंगा होने से किसनों दी प॑ंरआफतं नदी अती किन्तु मेहनत मज़दूरी करने वाले ओर लोगों पर _भी आती है, यंही नहीं, संभीं लोगीं पर उसका असर पड़ता है । ( सम्पत्ति शाख ) च दे बाबु श्यामसुन्दर दसि ` = दस गय की उत्पत्ति. से यह तात्पयं नदीं है क्रि -पटले ग्य थारी न्ी;-किसीन किसीसर्पसेथा। नदौ तो च्चा खोग पद्य मे.बातचीत करते थे ? गय _.बोलचाल में अवृष्य थाः पर, भिन्न भिन्च प्रान्तों गौर स्थानों, में भिन्न, भिन्न रूप... में था 1 जिने टम आजकं वोचियो. का नाम - देते; हैं, जैसे मागर के निकट ब्रजमाषा,बोली;जाती है. 1. , ` = भा




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