गुरु चेला को संवाद | Guru Chela Ko Samvad

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सम्यक्तना पांच मेद । ५ हिषे साध्तेवशस खस्य फे छे । , पाछलि जे भिथ्यात्वना तीन पुंज कट्या, ते मद उज्वल पुल एज, जे सम्यक्त मोहनीय कस्मै, जतीवार जीवने उदय आये, तेतलीवार तीजी कायाोपशमं सम्यक्तं कीये, ए सम्यक्त ने विवे दशन स्क जे ,पूठालि कद्या तेना विपाकी उदय नथी, 'पिण प्रदेशथी, अदुमवे छे, ए सस्यक्त एक जीवं ने संसार मांदे ममता थकां' आवे तो असंख्याती दार आवे, चौथा युणठाणा थी मांडी सातमा गुणटाणा ताईं देवे ॥ २॥ दिवे वैदक खम्यक्त लिख्यते । पाड्लि तीन एन कड्या, ञे मिथ्यात्वनातेमांहे उज्वल पुद्रल पुंज ञे सस्यक्त मोहनीनो, ते पण्‌ क्षायक मापे वे तियारे खपावे, ते खपावतां, २ अहता समय थाकते तिवारे वेदक सस्यक्त कदीये, कां एक सम्यक्त मोदनी- यना पुद्दल देदे ले, पिण सब देदे तो नहीं, ते ,माटे सस्यक्त जीव ने आवे दो एकदार आवे चउथा गुणठाणा थी सातसां तांइई होवे 1! ३ ॥ हिये साधिक सस्य कष्टे छे। ए दशन सक्र जे पालि कड्या ते सर्वथा क्षय दोषे, तिदारे ायिक सस्यक्त होवे, ए सम्यव्त चौधा गुणठाशा थी मांदी चचदमां ताड दोषे, श्रने युणटयाखा




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