हँसहिंडोल | hanshindol

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पहिली मचकी १६४ योगिया रे तोहिं योग करत दिन पोते १ शरुव ॥ राजयोग वयोग कयि वू मंत्रयोग लययोग । भेमयोग सीसैड नहिं योगी चन्त चला उि रते ॥ योगियी रे ० ॥ १ ॥ लस चोरसौ ्रासन साथेऽ मुद्दा नाद्‌ गैंभीर । श्वाषा लै दिगियेऽ गगनपर चित चेवल नटि जीति ॥ योगिया रे °॥२॥ दशम दार खोलेयञ ठम योगी सक्ति क्री तुम लाम । भक्ति सदेलिन मर्मन जानेउ हरि न गदेऽ तमं दीति ॥ योगिया रे० ॥ ३ ॥ लघिमा महिमाके याभिलापी दै चित सारं योग । हंससरुपहि > असिद्धि सल बिं हि लागत तीति ॥ योगिया रे तहिं योग कत० ॥ ४ ॥ [1 + श्रशिमा सिमा चैव गरिमा लधिमा तथां । श्राप्तिः भराकाम्यमीशिल वशित्वं चाट सिद्धयः ॥ १. थणिमां, २.भहिमा, ३. गरिमा, ४, सधिमा, ५.भाप्ति ६. पाकस्य, ७. ईशित्र घोर “वशित ये ध्राटं भकारकी सिद्चियां हैं ।




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