श्री पंचदशी सटीका सभाषा | sree panchdasi satika shabhasha

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Book Image : श्री पंचदशी सटीका सभाषा  - sree panchdasi satika shabhasha
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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. दशी]1 यरुस्तुति ॥ ष-आनंदखरूपभूत भूत अयुस्मूत प्रत 1दूत दरूरि दारि अवध्रुत वेशधारि हें ¶अविद्याई कीन्ही बाथ ! विद्या अलति खीन्दी हाथ । करिसाथ सिंह जैसे माथधारी मारि हें ॥ब्रह्मचारी ब्रततधारी श्रमजारु सारी जारी ।पारावार पारकारी खरूप संभारि हे ॥सरणग सुखदातं मात तात श्रात धात!ऐसे शुरु वापूहीकू वंदना हमारि हैं ॥ ॥ ७ ॥सहुरुखरूप राम काम धाम भक्तनिके ।नीके नेन वैन सैन देन दान ज्ञानको ॥तपपुंज पवित्र भताप ताप पाप तजे ।जन तन मन दरसन दयाचानको ॥अमर आचार ठान मान मतिमांहि नांहि ।जाहि जिय आहि ज्ञान ध्यान भगवानको ॥बरह्यरूप भये श्रमक्कूष भय भानतदहै। `नामत हँ माथ मत्तिसान सतिमानको ॥ ॥८ ॥प सवेया (मालिनी छंद ) ॥जास प्रसाद रचो अव यास प्रयास नही नहि त्रास घनेरो ॥ ध्यास गयो. परकास भयो भवपास मयो हसता अरु मेरो ॥ भास नस्यो श्रम भास रस्यो सम वास बस्यो सरवातमनेरो ॥ आस कल्यो जननास ज्यो परदास मच्यो नम तास हमेरो ॥ ९१ ता हम दास सदा सुखवास समे सब पास सुसंगत जाके ॥ दास डरे यम मासनरे भ्रमभास परे परमातम वाके ॥ `ुच्छन संत सुखुच्छन . खच्छित दच्छ दके जिमि चच्छ फलांके ॥ ` आतम्‌ ब्रह्म अभेद छ जानत । नामत हैँ दम मस्तक्र ताके १०.॥




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