इलाज | Elaaj

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
132
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)3४ ~श्रधूरा चित्र ॥ १७श्राकर् । स्पशं की कोमलता से सौदामिनी चौंक पढ़ी थी । फिर हलके टटोल कर
बोली थी-“बिन्नी, पुष्पा, सरला !”
श्रौर तब एकाएक खिलखिला कर किसी ने उसकी गोद में वेठते हुये कहा--
'*प्यरे ! नहीं, मैं हूँ शाकुन्तला 1”,
सौदामिनी खिलखिला कर हस पढ़ी ।
न्तु भी खूब हे, मेथा कय है तेरे ?””
“वह् क्या बाहर से सामान ला रहे हैं ?”* ॥
शकुन्तला एक घायल पत्ती की भाँति सौदामिनी के सीने से चिपक गद । र
` बोली--““ए्क मी पत्र नहीं मेजा सुरे, श्रौर सैया...!”
सौदामिनी ने देस कर शङ्कन्तला के गालो पर एक हलकी चपतं जड़ दी, वे श्रौर
भी सुख हो गये 1 । कि
प्रर तभी भीतर से श्रा गया कमल ! प
. शङ्न्तला को देख, वह टिठक गया । गोरा शरीर, इकहरा बदन, वैरो मेँ चप्पल ;
बढ़ी सुन्दर लगी वह । और तभी कमल को देख, उसकी शोर इशारा कर बोली
सौदामिनी-- “न्दं जानती हो १
५ शङुन्तला चौकी । श्रपने प्रति कहे गये वस्यों.की मीमांसा वह क्यों करे?
संभल कर गोद से नीचे उतरते बोली-- नहीं |”
कि श्रौीर तब बताया सौदामिनी ने--'““यह हैं * मिस्टर कमल ! आप के भैया फ बड़े
स्त 1१2
शकुन्तला ने उठ कर निकट पहुँच, धीरे से कहा-“'नमस्ते !””
कमल धारे से सुस्करा दिया । _.. . जि , >
। & सौदामिनी वोली--““श्रोर - एक वात वताङ ? यह बढ़े भारी चित्र- »
कार ह! व
खडी हई सौदामिनी की रोर देख कर बोली थी शङ्कन्तला--“तव तो श्रापकी
अवश्य ही...) क । .
“खुप !” सौद नाराज्ञ-सी . हो गई थी । दोली--““यह है शङन्तला,
मिस्टर कसल ! और आप है दुष्यन्त । कहीं उन्हों की भांति...
शकुन्तला ,खूब खिलखिला कर हँस पढ़ी थी ।
छीर कमल ने तब्र शकुन्तला का मुँह लज्जा से लाल होता पाया था! रातखाना खाते बताया था सौदामिनी ने--'“शकुन्तला की - यह भाभी लगती है। चार
दिन इये, चह श्रपने घर ग है ।””इ०-२
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