मिश्रबंधु - विनोद भाग - 1 | Mishr Bandhu Vinod Bhag - 1

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : मिश्रबंधु - विनोद भाग - 1  - Mishr Bandhu Vinod Bhag - 1
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about गणेशविहारी मिश्र - Ganesh Vihari Mishr

Add Infomation AboutGanesh Vihari Mishr

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
भूमिरा ` $पाटकों को. प्रस्येक फचि पी. बटाई-छोटाई का यहुन कम क्ञान डॉ सपता । यई पदाना फे प्ररसनीय-माय फटने से उनमें 'प्रपाद्धत प्रशंसा की साथ फो भेद वेन दो बहुन दषु पिना समन्ञनदी शा सदा । उधर सेसी-पिसाग स्थिर परने से यद भेद यहुत सीघ, दो दी शय्दो हारा, प्रकट ष जाना, शार विना श्रेनी.दिमाग के वर्णन यदरामि से घर बार पूर्ण ध्तर समस्त से या लाना कठिन है । सरोजकार एवं भाषाओं के न्य इलिएसयारो ने श्रग्पी-जिभाग स्थिर फिए पिना दो फप्रियें। की ध्रसासा की हे । इन प्रसंसाय्या से पिया दनाय मे कर्यो या श्पष्ापून गरिमा था भेद क्षात नी दोना । इसी धारण से इमने पिसी-प्राचीन प्रसाग के 'प्रभाय सें में। श्रेर्पी-पिभार चनानि फा सादरम क्या है । घ्रनेक सम्जन इससे इस यवारण यटुत उठ सुप्ट भी दो. गए है, पर दम्प सर्पो दूरा ठग उन्दोंने नहीं स्थिर दिया कि फंपियों की 'ग्रापेशिफ छोटाई-पड़ाई फसें य्यना फी जाय दन म्रग्ी-अधा को एम नहीं हटा सकने । प्रनियो म रण्यते कै विदाम मे हमने फेयल याय्य-पीड़ला पर ध्यानदिया है, एय “फपियों के सदासा या मारन प्रादियेने पी दष थी पररा नया पा, पेयल धेने णमे नष्टाग्यो फास परग एमन पि मी श्रेणी में नदी रफया । श्रेणी नियए फरने में सतसेद टना स्यामागिर् 7, प्योर इसमें भगई की यो 'यायरययला नहीं । सभी स्थानों पर एमारे सेररा से पपि फी किसी श्रेसी-पिशोष से स्थिति के कारणो नहीं सिलेंगे। एस मधान पर ये स्थितियों मारी 1 सर्सति-्साम प्रकट करती 7, तो उनः रियो की फपरिया टेसयने से स्थिर हुईं । यदि वो ससाशय दिलरी यपियों वे माथे पढेफर मार मनप शपा मानतो दन उने कय नहीं पहना है । श्रेरी-दिभाग उन्दी लोगों दो लाभदायप रो सफलता हि, जिनोंने इन फपियों में भय ने देर हो, श्रथ जो सारी यारउन्कपननपीन सर्सनिनताय को मरा साले । पिद्रसनो ये म्रयायनोसन से न सम्ससियों के फारण स्यथ उक या लाएंगे, कयोदि गभासाध्य पूर्ण पिणार ये याद ही सम्ससि हो गए है । प्रारयेस स्थान पर यारए लिग्नेमे ग्रथ ङ विन्नार रहा प्थिक यढ उपना । पाष्योगरन दमे चता, गरोर डोप कैप साने जासे हैं, डरा यु या एन नृरिति में भागे सिरेगा 1




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now