आत्मशुद्धि भावना | aatm suddhi bhavna

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
210
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)म = === = पल
( ७ )
उत्तर नद । देखा मानने पर पिले जीव शुद्ध है दस प्रकार
सानना पडेगा । जव जीव सर्वथा शुद्ध मानलिया गया तो फिर
| इसको कर्म लगे क्यों ? तथा इस प्रकार मानने पर अजीव
श्रथवा खिद्धों को भी कमे लग जाएँगे इसलिये यद्द पत्त भी
2 हा नहीं दे ।
प्रश्च--तो कया श्रात्मा श्रीर कमै युगपत् समय म दी
उत्पन्न हुए 1
उत्तर--नहीं । क्योकि इस प्रकार मानने पर 'छात्मा और
करमे दोनों दी उत्पत्ति धर्म वाले मानने पढ़ेंगे । सो जब आत्मा
और कमै उत्पत्ति घम वाले है तव न का विनाश भी मानना
पड़ेगा । तथा फिर दोनों की उत्पत्ति म दोनो के पष्टले कारण
क्या कया थे क्योकि कारण के मानने पर ही कार्य माना जा
सकता है जैसे मिट्टी से घड़ा। इसलिये यद्द पक्त भी ठीक नहीं
प्रतीत दोता 1
प्रश्न--तो क्या फिर जीव सदा कर्मी स रदित ही है ?
उत्तर--यह पक्त भी ठीक नदीं दे । क्योकि जब जीव कमी
से रहित ही मान लिया तो फिर इसको कम लगे स्यो?
तथा कर्मों के घिना ये संसार में दु ख घा खुख किस प्रकार भोग
९ सकता दै! तथा यदि क्म रहित भी श्चात्मा ससार चक्रमे
परिश्रमण कर सकता है तो फिर सुक्कात्माएं भी संसार चक्र में
६ परिश्रमण करने वाली माननी पदगी । अतः ज्ञीव कर्मों से
ही रदित भी नदी माना जा सकता 1
ही प्रश्न--तो फिर जीव श्चौर कर्म का स्वरूप किस यकार
५ मानना चादिष्ट है
4349 ल ग
भट इल्टिर्कड स्टिस्क अन्ना अर सह रमन न्त रन्न
॥ उत्तर--जीव श्रौर कमै का सम्बन्ध अनादि काल से है। ॥
त-न न्क ना पथ यप जम
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