हिन्दी की नख-शिख परम्परा एवं बलभद्र कृत सिख-नख | Hindi Ki Nakhshikh Parampara Avm Balbhadra Krit ’sikhnakh’

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Hindi Ki Nakhshikh Parampara Avm Balbhadra Krit ’sikhnakh’ by डॉ. सज्जन राम केणी - Dr. Sajjan Ram Keni

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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२ सिख-नख किसी विस्तृत विवेचन की अपेक्षा नहीं की जा सकती, किन्तु रीतिकालीन' साहित्य का विवेचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करनेवालों ने भी अभी तक बल- अद्र की काव्य-कला का अंशतः भी विवेचन नहीं किया है । जिन लेखकों ने. बलभद्र के संबंध में न्युनाधिक मात्रा में कुछ कहा भी है, वह केवरू सूचनात्मक, परिचयात्मक अथवा विवरणात्मक ही है, समीक्षात्मक या समालोचनात्मक नहीं । वस्तुतः बरभद्र कवि ओर उनका कृतित्व अनुसंघाताओं के लिए आकर्षक विषय हो सकता है । | ३. बलभद्र विषयक जानकारी देनेवाले ग्रंथ ` बरूभद्र के विषय में जिन म्रथों में भ्यूनाधिक मात्रा में जानकारी मिलती है, वे इस प्रकार है -- (अ) खोज-विवरणात्मक ग्रंथ : (१) हस्तलिखित हिन्दी पुस्तकों का संक्षिप्त विवरण-- (शला खंड) -- काशी नागरी प्रचारिणी सभा; (२) सरोज-सवेक्षण--डां०° किशोरीलाल गुप्त; (३) सिश्रबंधू-विनोद (प्रथम भाग)--मिश्रबंधु । (ब) साहित्यिक इतिहास-प्रंथ : (१) जॉर्ज प्रियर्सन कृत हिन्दी साहित्य का प्रथम इतिहास--संपादक डां ० किशोरीलाल गुप्त; (२) मिध्बंधु-विनोद; (३) हिन्दी साहित्य का इतिहास-- रामचंद्र शुक्ल; (४) हिन्दी भाषा ओर साहित्य का विकास--हरिगौघः; (५) हिन्दी साहित्य का ` आलोचनात्मक इतिहास--डों० रामकुमार वर्मा; (६) हिन्दी साहित्य--डां° धीरेन््र वमा, . डॉ० ब्रजेश्वर वर्मा; (७) हिन्दी साहित्य का उद्भव ओर विकास--डं० भगीरथ मिश्र ओौर पं० रामबहोरी शुक्ल; (८) ब्रज साहित्य का इतिहास--डं° सत्येन्द्र; (९) हिन्दी साहित्य और उसकी भमुख प्रवृत्तियां--डां° गोविदराम शर्मा; (१०) हिन्दी साहित्य का बृहत्‌ इतिहास (षष्ठ भाग )-सं० डं नगे; (११) हिन्दी साहित्य का इतिहास--रामशंकर शुक्ल “रसाल '; (१२) हिन्दी काव्यजञस्त् का इतिहास-- डॉ० भगीरथ मिश्र; (१३) हिन्दी साहित्य: युग और प्रवृत्तियाँ--प्रो० शिवकूमार शर्मा; (१४) हिन्दी साहित्य का इतिहास--डॉ० जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव; हरेन्द्र प्रताप सिन्हा । `




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