श्रीमद्भगवदगीता | shreemadbhagvadgeeta

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
shreemadbhagvadgeeta  by अज्ञात - Unknown

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अज्ञात - Unknown

Add Infomation AboutUnknown

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
५ अध्याय ५ [४३ अस्माकं ठ विशिष्ट ये तान्निबोध द्विजोत्तम । नायका मम सैन्यस्य संज्ञां तान्नवीमि ते ॥ ७ ॥ (३) भा. ए-वलवान काशीराज कन्तीमोज हैःपुरजित-तथा । त्यों चेकितान प्रसिद्ध है भटशेव्यके बलकी कथा॥१॥ हें उत्तमौजा च्रोजशाली -विक्रमी;युधपन्यु -भी । त्यो द्रौपदेय महारथी नरसिह वह अभिमन्यु मी ॥६॥ (४) . देखो खड़े हूं द्रोपदी के पुत्र पांचों भी यहाँ । जितने प्रसिद्ध महारथी हूं समरहित, संस्थित यहां ॥ द॥ द्विजश्रष्ठ सुनिय ध्यान दे निज.झोर जो वलधाम है। उन सुख्य सेना नायकों के ये प्रसिद्ध खुनाम है ॥ ७॥ अर्थ--धूषटकेत, चेकितान तथा वललवान कं1रिराज) पुर जित, कुन्तीमोज और .मतुष्यों में श्रेष्ठ -कषेव्य । ५। और पराक्रमी युघामन्यु तथा वल्नवान उत्तमौजा, सुमद्रापुत्र भ्रभिमन्यु ओर द्रौपदीःके। पांचो पुतः . यह सब ही मदारथी दहै । ६) हे व्राह्मण श्रेष्ठ ! हमारे” पंत्त 'में: भी जो प्रधान हैं उन को आप समकलीजिये ।' आप के जानने कं लिये “मेरी सेना के जो जो सेनापति हैं उन को कहता हूं । ७ । ` साघाथ-मददाराज इन योधा के अतिरिक्त घटोत्कच श्रादि दधार भी श्रनेक. यलवान योधा. उपीस्थत दै. 1- पारडर्वो-का नाम लेने की तो श्ावश्यकता ही नहीं; क्योंकि चह तो. लेंलोक प्रसिद्ध हैं ४ _ झौर ये प्तो नेः ऐसे -योधाओं के नाम गिनाये हैं जो. म्येक” अकेला दी




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now