ग्वालियर राज्य के अभिलेख | Gvaliyar Rajya Ke Abhilekh
श्रेणी : इतिहास / History

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Add Infomation AboutShri Harihar Niwas Dwivedi
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
11 MB
कुल पष्ठ :
221
श्रेणी :
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No Information available about श्री हरिहर निवास द्विवेदी - Shri Harihar Niwas Dwivedi
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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अभिलेख प्राप्त हुए हैं, यह भी सूचित कर दिया गया है । दूसरे परिशिष्ट में उन
स्थलों का उल्लेख है. जहाँ मूल स्थलों से हटे हुए अभिलेख रखे हुए हैं । तीधरे
परिशिष्ट में वे सब भौगोलिक नाम दिये गये हैं, जो इन सूचियों में आये हैं ।
इस प्रकार ग्राम, नदी, नगर, पर्वत श्यादि के प्राचीन नाम इसमें श्र गये हैं ।
चौथे परिशिष्ट में प्रसिद्ध राजवंशों के अभिलेखों की संख्याएं दी गई हैं । पाँचवें
परिशिष्ट मे राजा, दाता, दानग्रहीता, निमीणक्र, लेखक, कवि, उत्कीशेक श्चादि
व्यक्तियों के नामों की सूची दी गयी हे । छठवें परिशिष्ट में एक मानचित्र है ।
इस सूची के पूव एक प्रस्तावना भी लगा दी है। इस प्रस्तावना के चार खण्ड
हैं: प्रथम खण्ड में इन भिलेखों के विषय में व्यापक जा उकारी देने का प्रयास
किया है । दूसरे खण्ड में प्राप्त अभिलेखों के झाधार पर ग्वालियर का प्रादेशिक
राजनीतिक इतिहास संझिप रूप में दिया गया हैं । इस अंश को लिखने में में ने अन्य
पुस्तकों के अतिरिक्त स्व० डॉ० काशीप्रसाद जायसवोल एवं श्री जयचन्द्जी विद्या-
लंकार के ग्रंथ “अन्घकार युगीन भारत” तथा “भारतीय इतिहास की रूप-रेखा' से
सहायता ली है । ग्वालियर पुरातत्व विभाग के 'अवकाश-प्राप्त डायरेक्टर श्री
मा बि० गर्दे के बीस वर्ष के स्तुत्य प्रयास का भी उपयोग इस पुस्तक में है । यह
इतिहास तोमरवंश पर लाकर समाप्त कर दिया गया है। राजपूत राज्यों के
समाप्त होकर सुलतानों और मुगलों के राञ्य के स्थापन की कानी मेने अन्यत्र
के लिए सुरक्षित रखी है । तीसरे खण्ड में उन भौगोलिक नामों का विवेचन
दिया गया हूं; जो अभिलेखों में श्राये हैं । यह भाग मराठी 'विक्रम स्मृति-अंथ' में
लेख के रूप में भी छप चुका हे । चौथे खण्ड में धार्मिक इतिहास का संक्षिप्त
विवेचन है। यह सब प्रयास केवल सूचक है, 'झभी इसको अधिक विस्तार
की आवश्यकता है ।
इस प्रकार के प्रादेशिक अध्ययन के महच पर श्रधिक लिखने की
आवश्यकता नहीं । इससे न केवल एक प्रदेश के सास्कितिक गोरव का प्रदर्शन
होगा वरन् भारतीय इतिहास के निमोणु में भी सहायता पहुँचेगी ।
यह पुस्तक इस कम की मेरी चार पुस्तकों में से एक है। ग्वालियर की
पुरातत्व सम्बंधी सामग्री के अध्ययन के फलस्वरूप मैंने चार पुस्तकें लिखने का
संकल्प किया । “ग्वालियर राज्य के अभिलेख यह प्रकाशित हो रही है;
पवालियर राञ्यकी मूतिंक्लाःका आधा अंश “ग्वालियर राज्य में प्राचीन
मूर्तिकला' के नाम से निकल चुका है । बाघ-गुद्दा सम्बंधी पुस्तक के अंश लेख
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